Wednesday, December 21, 2011

इस्लामी आतंकवाद से लड़ा था. हम उस गुरुगोबिंद सिंह और सावरकर कि औलाद है



भाई, सभी संघियो, भारतप्रेमिओ, राष्ट्रप्रेमियो, राष्ट्रवादियो, इस मिटटी के
वीरो से एक बात कहेना चाहता हूँ कि एक झूट को एक लाख बार भी बोला जाये तो वो सच

नहीं हो जाता है. आप किसी दिग्भर्मित सिंह या किसी राहुल या सोनिया गाँधी से न डरे
और न ही झुके. क्यूंकि तुम्हारे बाप दादा भी नहीं झुके थे, जिनके बाप दादा घास कि
रोटिया खाकर और राणा सांघा जैसे लोग जिसके शारीर पर एक हजार जखम थे भी अंत तक

इस्लामी आतंकवाद से लड़ा था. हम उस गुरुगोबिंद सिंह और सावरकर कि औलाद है जिसने
वीरता कि नई गाथाये लिखी थी, हमारा आज का पंजाब जो इस्लामी आतंकवाद के १००० हमले खा
कर भी देश का सबसे संपन राज्ये है कि वीर भूमि के सपूत है. हम उस उन्नी कृष्णन के

भाई है जो केरला में पैदा हुआ, बेंगलोर में पढ़ा, बिहार रेजिमेंट में भर्ती होकर
कश्मीर कि सर्द हवाओ में देश के दुश्मन से टक्कर ली और महाराष्ट्र कि पवित्र भूमि
पर देश के अतंकवादियो से लड़ते वीरगति को प्राप्त हुआ. तो मेरे मित्र श्री

दिग्भर्मित सिंह जी आपकी त्रिमूर्ति को मेरे देश का बच्चा सबक सिखाने का जज्बा और
हौंसला रखता है. इस देश के लोग सो रहे है मरे नहीं है, और टुनिशिया - मिश्र कि जनता
से भी गए गुजरे नहीं जो अपनी सत्ता के नशे में अहंकारी और रक्षाशी अट्टहास से देश

कि जनता के ऊपर बैठे लोगो को सबक न सिखा सके. क्रांति मूर्त रूप ले रही है यह
घोटाले और भ्रष्टाचार का नंगा नाच उसपर महंगाई हर पेट को क्रांति कि जमी तैयार कर
रही है. राम के वनवास जाने से चाहए कितने रावन मारे गए परन्तु हिन्दू ने मन्थरा और

केकई को आज भी नहीं बक्शा है.
जय भारत जय

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