Wednesday, November 30, 2011

bharat swabhimaan: bharat swabhimaan

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# 1378 मे ईरान भारत से अलग हुआ - इस्लामिक देश बना

# 1761 मे अफगानिस्तान भारत से अलग हुआ - इस्लामिक देश बना

# 1947 मे पापिस्तान भारत से अलग हुआ इस्लामिक देश बना

# 1952 मे आजाद कश्मीर बना, भारत से अलग हुआ इस्लामिक देश बना

# 1971 मे बांग्लादेश भारत से अलग हुआ, इस्लामिक देश बना

# 1948 में आधा कश्मीर भारत से अलग हुआ पाकिस्तान में मिला POK(Pakistan occupied Kashmir )

मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था, "भारत के विभाजन का बीज तो उसी दिन पड़ गया था, जिस दिन प्रथम हिन्दू इस्लाम में दीक्षित हुआ था."

इस अलगाववादी सोच के आधार पर १४ अगस्त १९४७ को अधिकारिक रूप से भारत को
विभाजित कर दिया गया. परन्तु यह भारत का प्रथम विभाजन नहीं था. इसके पहले
भी भारत के अनेक टुकड़े किये गए. सर्वप्रथम २६ मई १७३९ को दिल्ली के बादशाह
मुहम्मद शाह अकबर ने इरान के नादिरशाह से संधि कर उपगणस्थान (अफगानिस्तान)
उसे सोंप दिया. आने वाले समय में क्रमशः नेपाल, भूटान, तिब्बत, ब्रह्मदेश
(म्यांमार) एवं पश्चिमी एवं पूर्वी पकिस्तान (बंगलादेश) भारत से अलग कर दिए
गए. स्वतंत्रता पश्चात सन १९४७ एवं सन १९६२ में आज के पाक अधिकृत लद्दाख
तत्कालीन राज्यकर्ताओं ने थाल में सजाकर पाकिस्तान एवं चीन को दे दिए.
सिकुड़ते जाने की इस यात्रा पर अभी पूर्ण विराम नहीं लगा है. चीन अब
अरुणाचल प्रदेश पर अपना अधिकार जता रहा है. कश्मीर घाटी को तोड़ने के
प्रयास चल रहे हैं, एवं करोड़ों बंगलादेशी घुसपैठिये पूर्वांचल समेत सारे
देश पर दृष्टि गडाए हैं.

ऐसे में महर्षि अरविन्द का यह कथन स्मरण रखना होगा -

"यह राष्ट्र धर्म के साथ पैदा हुआ, उसके साथ वह चलता है एवं उसी के साथ वह
बढ़ता है. जब सनातन धर्म का क्षरण होता है तब राष्ट्र का क्षरण होता है."

15 नवम्बर को यदि गांधी वध रुक जाता तो ३ फरवरी १९४८ को देश का एक और विभाजन पक्का था



अमर शहीद नाथूराम जी गोडसे (महात्मा गाँधी को मरने वाले.) का आज बलिदान
दिवस है आज के दिन उन्हें अम्बाला जेल में मृत्युदंड दिया गया था | इनका
पूरा नाम नाथूराम विनायकराव गोडसे था महज ३९ वर्ष की आयु में उन्हें वीर
गति प्राप्त हुई |



15 नवम्बर को यदि गांधी वध रुक जाता तो ३ फरवरी १९४८ को देश का एक और विभाजन पक्का था


जिन्ना की मांग थी कि पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में
बहुत समय लगता है .............और हवाई जहाज से जाने की सभी की औकात नहीं,
तो हमको बिलकुल बीच भारत से एक कोरिडोर बना कर दिया जाए जो :-


१. लाहौर से ढाका जाता हो

२. दिल्ली के पास से जाता हो

३. जिसकी चौड़ाई कम से कम १० मील यानि १६ किलोमीटर हो

४. १० मील के दोनों और सिर्फ मुस्लिम बस्तियां ही बनेगी



तत्कालीन परिस्थितियों में सभी भारतीय और पाकिस्तानी इस सत्य से परिचित थे
कि एक और विभाजन निश्चिंत है, उसके बाद नाथूराम गोडसे ने जो किया वो
इतिहास है, अगर गाँधी वध का संकल्प पूरा ना होता........... .तो आप ही
बताइये क्या आज भारत कितना होता ?


गोडसे जी भागे नहीं, और इस पुन्य कार्य को न्यायलय के सभी ३५ सुनवाइयों पर स्वीकार किया.

| भारत माता के इस वीर सुपुत्र को मेरे शत शत प्रणाम |



हुतात्मा श्री नाथूराम गोडसे जी को उनके बलिदान दिवस पर शत शत नमन आप हर
सच्चे भारतीय के ह्रदय में सदैव जीवित रहेंगे......... जय हिंदुत्व
......... जय सनातन धर्म.........जय हिंदू राष्ट्र..........जय माँ
भारती.......... !!जय श्रीराम —

हिन्दू धर्म का १९६०८५३११० साल का इतिहास हैं

हिन्दू धर्म का १९६०८५३११० साल का इतिहास हैं। भारत (और आधुनिक पाकिस्तानी क्षेत्र) की सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिह्न मिलते हैं। इनमें एक अज्ञात मातृदेवी की मूर्तियाँ,शिव पशुपति
जैसे देवता की मुद्राएँ, लिंग, पीपल की पूजा, इत्यादि प्रमुख हैं।
इतिहासकारों के एक दृष्टिकोण के अनुसार इस सभ्यता के अन्त के दौरान मध्य
एशिया से एक अन्य जाति का आगमन हुआ, जो स्वयं को
आर्यकहते थे,
आर्यों की सभ्यता को वैदिक सभ्यता
कहते हैं। पहले दृष्टिकोण के अनुसार लगभग १७०० ईसा पूर्व में आर्य
अफ़्ग़ानिस्तान, कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में बस गये। तभी से वो लोग (उनके
विद्वान ऋषि) अपने देवताओं को प्रसन्न करने के लिये वैदिक संस्कृत में
मन्त्र रचने लगे। पहले चार वेद रचे गये, जिनमें
ऋग्वेद
प्रथम था। उसके बाद उपनिषद जैसे ग्रन्थ आये। हिन्दू मान्यता के अनुसार
वेद, उपनिषद आदि ग्रन्थ अनादि, नित्य हैं, ईश्वर की कृपा से अलग-अलग
मन्त्रद्रष्टा ऋषियों को अलग-अलग ग्रन्थों का ज्ञान प्राप्त हुआ जिन्होंने
फिर उन्हें लिपिबद्ध किया।
बौद्ध और धर्मों के अलग हो जाने के बाद वैदिक धर्म मे काफ़ी परिवर्तन आया। नये देवता और नये दर्शन उभरे। इस तरह आधुनिक हिन्दू धर्म का जन्म हुआ।
दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार हिन्दू धर्म का मूल कदाचित सिन्धु सरस्वती परम्परा(जिसका स्रोत मेहरगढ़ की ६५०० ईपू संस्कृति में मिलता है) से भी पहले की भारतीय परम्परा में है।

भारतवर्ष को प्राचीन ऋषियों ने "हिन्दुस्थान" नाम दिया था जिसका अपभ्रंश "हिन्दुस्तान" है। "बृहस्पति आगम" के अनुसार:

हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥

अर्थात, हिमालय से प्रारम्भ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है।

वह धर्म या संस्कृति भारतीय ( हिन्दू ) कैसे हो सकती है।

1. ईश्वर एक नाम अनेक

2. ब्रह्म या परम तत्त्व सर्वव्यापी है

3. ईश्वर से डरें नहीं, प्रेम करें और प्रेरणा लें

4. हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर

5. हिन्दुओं में कोई एक पैगम्बर नहीं है, बल्कि अनेकों पैगंबर हैं.

Monday, November 28, 2011

देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यको यानी मुसलमानों का है


  अभी कुछ दिन पहले इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक फैसले के तहत भारत में इस्लाम मतावलंबी अल्पसंख्यक नहीं है ऐसा निर्णय दिया था, दुर्भाग्य है कि न तो भारत सरकार न तो राज्य सरकार  ने इस निर्णय के प्रति गंभीरता दिखाई एक तरफ देश के गृहमंत्री कहते है कि इस्लाम विदेशी धर्म नहीं है दूसरी तरफ वे मुसलमानों को अल्पसंख्यक भी मानते है जब कि अल्पसंख्यक की परिभाषा में आता है कि जो विदेशी धर्म व संस्कृति है उनके सुरक्षा व संरक्षण हेतु उन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है, कोर्ट का निर्णय भारतीय जनता ने ऐतिहासिक कहा तो भारत सरकार व सेकुलर फोर्सेस ने निर्णय की आलोचना की.
          बीसवी शताब्दी ने अनेक साम्राज्यों को नष्ट होते देखा, साथ ही धरती पर अनेक नए देशो को जन्म लेते हुए भी, इस उथल - पुथल ने कुछ ताकतों को अल्पसंख्यक से बहुसंख्यक बना दिया और बहुसंख्यको को अल्पसंख्यक में तब्दील कर दिया. इस तरह कहा जा सकता है की कौन सा समूह कब अल्पसंख्यक बन जायेगे और कब बहुसंख्यक का रूप धारण कर लेगे कुछ नहीं कहा जा सकता .
           मानव इतिहास में अब तक चार बड़े सामाज्य स्थापित हुए, इनमे अटोमन, ओस्टो हंगेरियन, ब्रिटिश  और रूशी साम्राज्य का समावेश हो जाता है ये चारो बने और फिर टूटे, उसके साथ ही उनकी सीमाओ में अल्पसंख्यक भी अस्तित्व में आए, एक प्राकृतिक भूभाग को जब राजनैतिक ईकाइ  बनाया जाता है तब उसमे  रहने वाले इन्शान का धर्म, भाषा, वंश और उसकी संस्कृत मिट तो नहीं सकती, लेकिन किसी अन्य के दबाव में आ जाते है, जहा से कभी न समाप्त होने वाला संघर्ष शुरू हो जाता है .
            इंग्लैण्ड और आयरलैंड का संघर्ष पुराना है, उक्त संघर्ष ईशाई धर्म के दो पन्थो प्रोटेस्टेंट और रोमन कैथोलिक के बीच है, ट्रांस्वेल सहित सभी स्थानों पर इन पन्थो के बीच अल्पसंख्यक - बहुसंख्यक बिबाद है, यूरोप में अल्पसंख्यक समूहों  के बीच एक-दुसरे से बिबाद होने के उपरांत भी उनमे सांस्कृतिक एकता बनी रहती है क्यों कि वे सभी एक ही ईशु के अनुयायी है.
              इजराइल में १५ प्रतिशत अरब अल्पसंख्यक है, यहूदी जनता के साथ उनका अच्छा तालमेल है यहूदी और अरबी संस्कृति में अधिक अंतर नहीं है, इसलिए उन १५ प्रतिशत अरब अल्पसंख्यको को कोई कठिनाई नहीं होती वे इजराइल सरकार के साथ अपने अच्छे सम्बन्ध बनाये हुए है.
            भारत में एक अल्पसंख्यक पारसी भी है जो कर्मयोगी है इसलिए वे अल्पसंख्यक होने बावजूद कभी न तो सरकार से आर्थिक सहायता की माग की न ही आरक्षण जैसा मुद्दा उठाया है, अल्पसंख्यक होने के नाते उनका कभी हिन्दू समाज से टकराव नहीं हुआ उस समाज ने सरकार से न तो कोई धार्मिक अधिकार मागे और न ही राजनैतिक अधिकार के लिए संघर्ष किया इसके बावजूद उस समाज से कई संसद और मंत्री व प्रतिष्ठित राजनेता हुए इसी समाज ने नाना पालकीवाला और टाटा जैसा लब्ध प्रतिष्ठित वकील और उद्द्योगपति दिया, इस समाज ने कभी भी भेद-भाव का अनुभव नहीं किया . 
           इस्लामी सिद्धांत के अनुसार मुस्लिम देश 'अल्पसंख्यक' शब्द में विस्वास नहीं रखते, उनका मानना है की यदि तुम वहा इस्लामी राज्य स्थापित नहीं कर सकते हो तो जहा रह रहे हो वहा से हिजरत [पलायन] कर जावो, इस्लाम में दारुल हरब और दारुल इस्लाम नामक शब्दावली है, जहा मुस्लिम अल्पसंख्या में होता है तब उसे 'दारुल हरब'अर्थात दुश्मन का देश कहा जाता है, दारुल हरब को दारुल इस्लाम बनाने के लिए उन्हें धर्मान्तरण से जेहाद तक का हथियार उपयोग  करना चाहिए भारत तो इस समस्या को कश्मीर, असम और प्.बंगाल में झेल ही रहा है चीन अपने झियांग और रुश चेचन्या में जूझ रहा है..
             अल्पसंख्यक के रूप में मुस्लिम जब किसी विशेष क्षेत्र में रहते है तो शनैः -शनैः अपनी संख्या बढ़ाते जाते है, जब जनसँख्या अच्छी हो जाती है तब वे अपने स्वतंत्र देश की माग करना शुरू कर देते है अथवा स्वतंत्र इस्लामिक देश के रूप में परिणित हो इसकी मुहीम चलते है. आज भारत इसका शिकार बना हुआ है भारत से अधिक इस समस्या को कौन समझ सकता है हमने विक्रमादित्य के मक्केस्वर महादेव के मंदिर खोये है, गांधारी तथा बुद्ध का कंधार गवाया, केशर की क्यारी छिन्न- भिन्न होते देखा कहा है हिंगलाज --?, कहा है ननकाना---?, मल-मल के कपड़ो का ढाका, धाकेस्वरी मंदिर को जाते देखा, भारत छिन्न-भिन्न हो गया जो दुनिया का गुरु स्थान पर था वैभव संपन्न था वह बिखर गया टुटा- फूटा भारत कैसा ---- आये दिन हिन्दू समाज प्रताड़ित किया जा रहा है जहा- जहा मुस्लिम की संख्या अधिक है वहा दुर्गापूजा या रामलीला और महाबीरी झंडा उठाना दूभर हो गया है मखतब और मदरसे आतंकबाद की नर्शरी की तरह काम कर रहे है.
          सेकुलर के नाम पर सभी पार्टियों के नेता देशद्रोह पर उतारू है तुष्टी करण कर देश को बिभाजन की तरफ ले जा रहे है कांग्रेश को तो देश से कोई मतलब ही नहीं है हो भी क्यों --- सोनिया का भारत से या भारतीय संस्कृत से क्या मतलब देश रहे या न रहे वह  तो आज भी इटली की नागरिक है राहुल की पढाई -लिखाई तो रुश की ख़ुफ़िया एजेंशी के.जे.बी.के द्वारा हुई है उनसे उम्मीद रखना तो भारतीयों की मूर्खता के अतिरिक्त कुछ नहीं और कांग्रेसी गुर्गे केवल सोनिया और राहुल के भजन गाने में लगे हुए है, हमारे प्रधानमंत्री तो एक कदम और आगे बढ़कर आग में घी डालने का काम करते है, कहते है की देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यको यानी मुसलमानों का है  .
              हिन्दुओ की दशा उसी प्रकार होने वाली है जैसे कोई जीव जंतु समाप्त होने लगता है तो उसे चिड़िया घर में सुरक्षित रखा जाता है जब वह भी मर जाता है तो उसे अजायब घर में विश्व को दिखने लिए सुरक्षित रख दिया जाता है की इस प्रकार के भी जीव दुनिया में थे आज उसी प्रकार हिन्दुओ की दशा होने वाली है ,हिन्दुओ सोचो, समझो, और उसके लिए कुछ करो अपने समाज को संगठित, सुसंस्कृत और शिक्षित बनाओ तुम्हे बचाने कोई और बिदेशी नहीं आयेगा तुम्हे ही आगे आना पड़ेगा. 

भारत के अल्पसंख्यक कौन है और क्या है इनका उद्देश्य ----भारतीय अस्तित्व को खतरा ------?

एक ऐसा समय था भारत सुखी-संपन्न था विश्व गुरु की उपाधि से नवाजा जाता था यहाँ युद्ध नहीं शास्त्रार्थ हुआ करता था पश्चिम के अक्रान्ताओ की नज़र भारत पर पड़ी और हमला पर हमला शुरू कर दिया मुहम्मदबिन कासिम से लेकर यानी ७२० ईशा से आज-तक हमले जारी है क्या हम इन्ही की संतानों को हम अल्पसंख्यक मान रहे है और इन्हें ही सर्बाधिक सुबिधा प्रदान कर रहे है --- ? ईशा ७१२ में मुहम्मद्बिन कासिम ने भारत के पश्चिमी सरहद पर हमला किया उस समय सिंध के राजा महाराजा दाहिर थे अफगानिस्तान में बौद्धों का शासन था उनका दोष यह था की वे अपने ग्रन्थ के अतिरिक्त कुछ नहीं जानते थे बौद्धों ने राजा दाहिर के खिलाफ जासूसी किया मुहम्मद्बिन कासिम और राजा दाहिर में युद्ध हुआ कुछ लोगो से धोखा के कारन राजा की पराजय हुई यह बात ठीक है कि राजा दाहिर की पुत्रियों ने खलीफा से इसका बदला मुहम्मद्बिन कासिम और खलीफा की हत्या करके ले लिया.
मुसलमान भारत की तरफ ललचाई आखो से देख ही नहीं रहा था बल्कि लगातार हमले पर हमला करता जा रहा था कुछ समय पश्चात् ही सोमनाथ मंदिर को लूटने की दृष्टि को लेकर ही नहीं हिन्दुओ को अपमानित करने, हिन्दुओ का धर्म झूठा है, मूर्तियों में कोई दम नहीं है, हिन्दू संगठित नहीं है---? अपने धर्म के प्रभुत्व को कायम करने इत्यादि कारणों को लेकर महमूद गजनवी ने रेगिस्थान को पार करता हुआ गुजरात पर अटैक किया युद्ध बहुत भीषण हुआ मंदिर तो लुटा -टुटा लेकिन महमूद गजनवी वापस अपने देश नहीं जा सका रास्ते में उसे गुरिल्ला युद्ध झेलना पड़ा और गुजरात, भारतीय सीमा के राजपूतो, राजाओ, और रखवालो ने उसे पराजित ही नहीं अपना बदला भी ले लिया और उसकी मृत्यु इसी धरती पर हुई .
इस्लाम धर्म का प्रवर्तक स्वयं ही एक आतंकबादी था मुहम्मद साहब आतंक का पर्याय बनकर खड़ा था उसने अपने जीवन काल में कोई अच्छा कार्य नहीं किया केवल हिंसा, हत्या और अनाचार के अतिरक्त कुछ नहीं किया, उसके जीवन का इतिहास बड़ा ही मानवता बिरोधी है उसने १३ बिबाह तो किया ही था सैकड़ो रखैल भी रखा था वह बड़ा ही कामुक था, अपनी पत्नी आयसा के साथ सम्भोग करते समय उसे आयत का इल्हाम होता था ऐसे हदीस में आयसा के मुख से बताया गया है, हम सकझ सकते है कि उसके अनुयायी किस प्रकार होगे, इस नाते सभी मुस्लिम बादशाहों के पास सैकड़ो रखैले होती थी.
बहुत दिन बीता नहीं था कि मुहम्मद गोरी का हमला महाराजा पृथ्बीराज चौहान के ऊपर हुआ १६ बार मुहम्मद गोरी को हराया उसे गलती मानने व क्षमा मागने पर छोड़ दिया करते यही राजा की सबसे बड़ी भूल थी [सद्गुण बिकृति ] एक समय आया कि कन्नौज के राजा ने अपनी ब्यक्ति गत शत्रुता को आगे कर देश को पीछे छोड़ मुहम्मद गोरी से मिलकर दिल्ली पर हमला करवाया उस युद्ध में पृथ्बीराज चौहान की पराजय हुई, गोरी ने उन्हें छोड़ा नहीं अपनी राजधानी ले जाकर उनकी आख निकलवा लिया तमाम हिन्दुओ को मुसलमान बनाया गया, दिल्ली पर अभूतपूर्व अत्याचार किया गया, उनके मित्र कबि और प्रधानमंत्री चंद्रबर दाई की योजना से मुहम्मद गोरी की हत्या हुई पृथ्बीराज चौहान शब्द बेधी बाण चलाना जानते थे, [चार बास चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण , ता ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान ] एक हाथ में तलवार दुसरे हाथ में कुरान लेकर भारत पर हिन्दुओ पर हमला, लाखो लोगो का बलात धर्मान्तरण .
श्रृखला बद्ध भारत मुस्लिम अक्रान्ताओ के हमले की धरती बनी रही मंगोल का रहने वाला बाबर का भारत पर हमला जिसका मुकाबला महाराणा सांगा से हुआ [७५ घाव लगे थे तन पे फिर भी ब्यथा नहीं थी मन में ] अद्भुत मुकाबला हुआ, लेकिन हिन्दू मुसलमानों को समझ नहीं पाए उनकी कुरान के बारे में तो जानते नहीं थे, कुछ सूफी संत प्रेम मुहब्बत की बात कर इस्लाम के बारे में प्रशंसा व प्रचार करते जब कि इस्लाम में तो प्रेम मुहब्बत नाम की कोई चीज नहीं धीरे-धीरे बाबर दिल्ली की गद्दी पर बैठा, बाबर से औरंगजेब तक ने लाखो करोड़ो हिन्दुओ को बलात इस्लाम धर्म में परिवर्तन करवाया इतना ही नहीं श्रीराम जन्म भूमि, श्रीकृष्ण जन्म भूमि, काशी विश्वनाथ मंदिर और गुजरात के सोमनाथ मंदिर व अन्य श्रद्धा स्थानों को ढहाया इन सबका उद्देश्य केवल धन लूटना या साम्राज्य बढ़ाना ही नहीं हिन्दुओ को अपमानित करना भी था जगह -जगह धर्म युद्ध हुए हिन्दुओ ने लगातार संघर्ष किया कभी पराजय स्वीकार नहीं की. [चौहत्तर मन यज्ञो पवीत तौले है किसने याद मुझे, दस कोटि यवन भारत भू पर किस भाति हुए है याद मुझे] .
इस प्रकार हिन्दू समाज पर मुसलमानों का हमला जारी रहा बख्तियार खिलजी ने कुछ सैनिको के साथ नालंदा विश्वविद्यालय के केवल पुस्तकालय को ही नहीं जलाया बल्कि उसे नष्ट -भ्रष्ट कर हिन्दुओ को अपमानित जीवन -जीने को मजबूर कर दिया पूरे भारत को तहस -नहस कर डाला महिलाओ के साथ बलात्कार बच्चो को ऊपर फेक कर भाले पर रोक कर हत्या करना आम बात हो गयी थी हिन्दू जाति -पराजित जाति उसकी कितनी दुर्दसा हुई होगी इसकी कल्पना हम कर सकते है जजिया कर तो आम बात हो गया था, एक ऐसी धारणा बनी हुई है कि अकबर सबसे उदार बादसाह था हम सभी को पता है की वह मीना बाज़ार लगवाता था उसके नौ रत्न राजा टोडरमल से लेकर बीरबल तानसेन सभी को इस्लाम स्वीकार करना पड़ा था जहागीर तो जोधाबाई का ही पुत्र था जिसने गुरु अर्जुनदेव का बध करवाया था.
हम बिचार करना चाहते है कि ये अल्पसंख्यक कौन है इन आक्रमण कारियों, अक्रान्ताओ, हमलावरों जिनमे मुहम्मदबिन कासिम, महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी, बाबर, हुमायु, अकबर, जहागीर, शाहजहा, औरंगजेब, तुगलग, कालापहाड़, नादिरशाह, बख्तियार खिलजी जैसे --- बर्बर ,हिंसक, पैशाचिक कृत्य करने वाले जिन्होंने हमारी धरती माता के साथ बलात्कार किया हमारे समाज को अपमानित, जिन्होंने हमारे महापुरुषों और हमारे आराध्य देवो के मंदिरों को हिन्दू संस्कृति को भ्रष्ट - नष्ट किया क्या वे यही है ? इन्ही की संतानों को हम अल्पसंख्यक मान रहे है हमारे प्रधानमंत्री कहते है कि भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार इन्ही की संतानों का है,------ इस पर हमें सोचना ही होगा -- नहीं तो क्या हम एक बार फिर भारत का बिभाजन चाहते है? हम १९४७ में यह झेल चुके है भारत की एक तिहाई जमीन इन बिधर्मियो को दे चुके है, अफगानिस्तान जा चुका है इन बर्बरो की संतानों को जो दिन-दूना रात चौगना बढ़ रहे है वे पूरे भारत को निगलने के प्रयास में है क्या इन्हें ही अल्पसंख्यक माना जायेगा, मखतब, मदरसो को आतंकबाद की नर्शरी जहा-- हिन्दू संस्कृति व भारत बिरोध में ही शिक्षा दी जाती है लव जेहाद के माध्यम से जिसे उनके मुल्ला -मौलबी बढ़ावा देने का कार्य करते है, वे मुहम्मद के पैशाचिक जीवन को आदर्श मानकर लाखो हिन्दुओ की लडकियों को भगा कर ले जाना, आए दिन हिन्दुओ के त्योहारों व मंदिरों पर हमले करना, छठ और दुर्गापूजा मनाने में बाधा डालना, जिस गाव में हिन्दू कम है वहा तो शादी -बिबाह में बैंड बाजा भी नहीं बजने देते उनकी बहन बेटियों की सुरक्षा हमेशा खतरे में ही रहती है वे आज भी अपने को शासक की भूमिका में रखते है हिन्दुओ के साथ गुलाम जैसा ही ब्योहर करना इसी मानसिकता का द्योतक है.
आखिर इनका जबाब क्या है किसी ने लिखा था कि धर्म युद्ध ही इसका जबाब है राणासांगा, महाराणा प्रताप, शिवाजी महराज, गुरु गोविन्द सिंह और बन्दा वीरबैरागी इन महापुरुषों ने धर्म युद्ध के माध्यम से ही इन कट्टर पंथियों को परास्त किया था और भारतीय संस्कृति हिन्दू समाज की रक्षा की थी हम अपने महापुरुषों के कथनों को भूल गए है गुरु नानक देव कहते थे 'बालू परे निकले तेल ,बैर के पेड़ में फल जाये बेल, कुकुर पानी पिये सुड़क्का तबु न विस्वास करऊ तुरुक्का.' गुरु गोविन्द सिंह कहते थे ;जन विस्वास करौ तुरुक्का', तुलसीदास ने तो हमेसा इन्हें मलेक्ष ही कहा, संत कुम्हनदास ने तो अकबर के भरे दरवार में उसे पापी कहा 'जाको मुख देखत अघि लागत', ये कौम विस्वास योग्य नहीं है भारत और भारतीयता के शत्रु की भूमिका में है, भारत सरकार इन्ही को अल्पसंख्यक दर्जा देकर हिन्दुओ को गुलाम बनाने की साजिस कर रही है मानवता के साथ घनघोर अपराध भारत सरकार तथा सेकुलर नेता कर रहे है ये सभी अल्पसंख्यक और सेकुलर के नाम पर देशद्रोह पर अमादा है
अल्पसंख्यकबाद अब केवल वोट का सौदा बन कर रह गया है वह उसी के सहारे अपनी सभी नाजायज मागे मनवाता रहता है इन पर अंकुश रखने के लिए लगभग सभी देश इस बात पर सहमत है कि उन्हें राजनैतिक अधिकार नहीं दिए जाने चाहिए, क्यों कि राजनितिक अधिकार मिलते ही वे देश में शासन करने का सपना देखने लगते है अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वे अनेक मार्ग अपना लेते है दुनिया के मानचित्र पर नज़र दौड़ाते है तो पता चलता है कि इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए लोगो ने तीन प्रकार के उपाय किये है, पहले वे देश है जो धर्म को जादे महत्व देते है उनके लिए शरियत सर्बोपरी है, इसलिए गैर मुस्लिमो को कोई अधिकार नहीं देती. अरब भूखंड में १८ देश है, जहा लाखो ईशाई और हिन्दू रहते है लेकिन इन लोगो को न तो नागरिकता दी जाती है और न ही किसी प्रकार के राजनितिक अधिकार, उन्हें अपने धर्म के मामले में कोई छुट नहीं है वे वहा रहने वाले हिन्दुओ को न तो राखी का त्यौहार मनाने देते है न दीपावली न ही गणेश चतुर्दशी, उनके शब्द कोष में 'सर्बधर्म समभाव ', सहिष्णुता', और मानवता जैसे शब्द नहीं मिलते है, अमेरिका में केवल एक ही कानून है वह सभी अमेरिकन के लिए वहा भी अल्पसंख्यक को राजनैतिक अधिकार नहीं है, सम्यबादी देशो में भी जैसे चीन, सोबियत रूश ने भी इस सिद्धांत को मंजूर नहीं किया मुस्लिम बहुल वाले स्थानों पर बाहर से स्थानीय जातियों को लाकर बसाया और संतुलन कायम करने का प्रयास किया पश्चिम बंगाल की सम्यबादी ब्यवस्था में भी समाधान नहीं निकला मदर्शो की बढती हुई संख्या को देख कर बामपंथी परेशान है उनके पास भी कोई समाधान नहीं है, आज धार्मिक उन्माद की आधी और आतंकबाद के झंझाबात ने इस महान विरासत पर हमेशा के लिए प्रश्नवाचक चिन्ह लगा दिया .
अल्पसंख्यकबाद मानव सभ्यता के लिए धोखा है, इसलिए हर जागरूक हिन्दू और देश भक्त का इसके प्रति सतर्क और सावधान रहना स्वाभाविक ही नहीं आवस्यक भी है अपने देश को धर्मशाला बनाने से रोके, तीन करोड़ बंगलादेशी और पाकिस्तानी भारत में अवैध रूप से घुसपैठ किये है पूरा का पूरा एक देश ही भारत में घुस कर हमारी अस्मिता को चुनौती दे रहा है, आज भी हमारी सबसे बड़ी भूल है जो हम इस्लाम के बारे में अपने समाज को शिक्षित नहीं कर पा रहे है, इस खतरे से हमें सावधान होना होगा नहीं तो ये इस देश को ही नहीं भारतीय संस्कृति को निगल जायेगे.

Saturday, November 26, 2011

तिरंगे जलाए और भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज को जूतों से कुचला

पाकिस्‍तान में सरकार ने आतंकियों को भारत के अपमान की खुली छूट दे रखी है। मुंबई हमलों के आरोपी पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जमात-उद-दावा भारत को सबसे तरजीही देश (मोस्‍ट फेवर्ड नेशन-एमएफएन) का दर्जा दिए जाने के पाकिस्‍तानी सरकार के फैसले के विरोध में लगातार रैली कर रहा है।
पाकिस्‍तान के कई शहरों में आयोजित की गई रैलियों को संबोधित करते हुए जमात के नेताओं ने मंच से खुलेआम भारत के खिलाफ जहर उगला। प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे लगाए, तिरंगे जलाए और भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज को जूतों से कुचला। पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देखती रही।

स्‍थानीय अखबारों के मुताबिक जमात के नेताओं ने कहा, ‘भारत को एमएफएन का दर्जा देना हजारों बेगुनाह कश्‍मीरियों की शहादत का अपमान है। भारत में निर्दोष कश्‍मीरी मुसलमान मारे गए और ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद ढहा दी गई। ऐसे में पाकिस्‍तान को भारत के साथ सिर्फ नफरत, बदला और बुलेट का रिश्‍ता रखना चाहिए।’

हैरत की बात है कि उसी आतंकी संगठन ने यह रैली पाकिस्‍तानी सरकार की नाक के नीचे किया, जिसे 2008 में हुए मुंबई हमले का जिम्‍मेदार बताया जा रहा है। यह रैली ऐसे समय हुई जब इस आतंकी हमले को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसी खबर है कि लाहौर में हुई इस रैली में हिस्‍सा लेने के लिए आसपास के गांवों के किसानों को 2 से 5 हजार रुपये देने का लालच तक दिया गया।

गुरुवार को हुई इस रैली में जमात-उद-दावा के समर्थन में पाकिस्‍तान के अन्‍य धार्मिक और राजनीतिक संगठन के सदस्‍यों ने भी हिस्‍सा लिया। रैली में पहुंचने से पहले लोगों ने आजादी चौक से नसीर बाग तक इस्‍तकाम-ए-पाकिस्‍तान कारवां में हिस्‍सा लिया।

नसीर बाग में रैली में संबोधित करते हुए जमात के नेता मौलाना अब्‍दुल रहमान मक्‍की ने कहा कि यदि भारत को सबसे पसंदीदा देश का दर्जा देने के फैसले को वापस नहीं लिया गया तो पाकिस्‍तान की अवाम का गुस्‍सा और बढ़ेगा। जमात नेता ने आरोप लगाया कि भारत व्‍यापारियों की आड़ में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंटों को पाकिस्‍तान में भेजने की कोशिश में है।

जमात के एक अन्‍य नेता अमीर हमजा ने कहा कि जमात प्रमुख हाफिज मोहम्‍मद सईद ने कश्‍मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को भरोसा‍ दिया है कि जमात-उद-दावा भारत को एमएफएन का दर्जा दिए जाने के किसी भी कदम का विरोध करेगा।

रैली में मौजूद जमात के नेताओं ने पाकिस्‍तान में पानी की कमी के लिए भी भारत को ही जिम्‍मेदार ठहराया। हमजा ने कहा, ‘पंजाब की नदियों का पानी रोककर पाकिस्‍तान को बंजर बनाने की इजाजत हम भारत को नहीं देंगे। पाकिस्‍तान के बेवकूफ नेता भारत को इन नदियों का पानी रोकने की इजाजत देकर भारत से महंगे दर पर बिजली खरीदने जा रहे हैं।’

आपकी राय

क्‍या इस तरह के माहौल में पाकिस्‍तान से दोस्‍ती की उम्‍मीद की जा सकती है? क्‍या पाकिस्‍तान सरकार का यह दोहरापन नहीं है? इससे यह नहीं लगता कि सरकार भारत विरोधी प्रोपैगंडा में आतंकियों की मददगार है? अपनी राय सभी पाठकों के साथ शेयर करें और बहस में शामिल हों...

तिरंगे जलाए और भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज को जूतों से कुचला

पाकिस्‍तान में सरकार ने आतंकियों को भारत के अपमान की खुली छूट दे रखी है। मुंबई हमलों के आरोपी पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जमात-उद-दावा भारत को सबसे तरजीही देश (मोस्‍ट फेवर्ड नेशन-एमएफएन) का दर्जा दिए जाने के पाकिस्‍तानी सरकार के फैसले के विरोध में लगातार रैली कर रहा है।
पाकिस्‍तान के कई शहरों में आयोजित की गई रैलियों को संबोधित करते हुए जमात के नेताओं ने मंच से खुलेआम भारत के खिलाफ जहर उगला। प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे लगाए, तिरंगे जलाए और भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज को जूतों से कुचला। पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देखती रही।

स्‍थानीय अखबारों के मुताबिक जमात के नेताओं ने कहा, ‘भारत को एमएफएन का दर्जा देना हजारों बेगुनाह कश्‍मीरियों की शहादत का अपमान है। भारत में निर्दोष कश्‍मीरी मुसलमान मारे गए और ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद ढहा दी गई। ऐसे में पाकिस्‍तान को भारत के साथ सिर्फ नफरत, बदला और बुलेट का रिश्‍ता रखना चाहिए।’

हैरत की बात है कि उसी आतंकी संगठन ने यह रैली पाकिस्‍तानी सरकार की नाक के नीचे किया, जिसे 2008 में हुए मुंबई हमले का जिम्‍मेदार बताया जा रहा है। यह रैली ऐसे समय हुई जब इस आतंकी हमले को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसी खबर है कि लाहौर में हुई इस रैली में हिस्‍सा लेने के लिए आसपास के गांवों के किसानों को 2 से 5 हजार रुपये देने का लालच तक दिया गया।

गुरुवार को हुई इस रैली में जमात-उद-दावा के समर्थन में पाकिस्‍तान के अन्‍य धार्मिक और राजनीतिक संगठन के सदस्‍यों ने भी हिस्‍सा लिया। रैली में पहुंचने से पहले लोगों ने आजादी चौक से नसीर बाग तक इस्‍तकाम-ए-पाकिस्‍तान कारवां में हिस्‍सा लिया।

नसीर बाग में रैली में संबोधित करते हुए जमात के नेता मौलाना अब्‍दुल रहमान मक्‍की ने कहा कि यदि भारत को सबसे पसंदीदा देश का दर्जा देने के फैसले को वापस नहीं लिया गया तो पाकिस्‍तान की अवाम का गुस्‍सा और बढ़ेगा। जमात नेता ने आरोप लगाया कि भारत व्‍यापारियों की आड़ में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंटों को पाकिस्‍तान में भेजने की कोशिश में है।

जमात के एक अन्‍य नेता अमीर हमजा ने कहा कि जमात प्रमुख हाफिज मोहम्‍मद सईद ने कश्‍मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को भरोसा‍ दिया है कि जमात-उद-दावा भारत को एमएफएन का दर्जा दिए जाने के किसी भी कदम का विरोध करेगा।

रैली में मौजूद जमात के नेताओं ने पाकिस्‍तान में पानी की कमी के लिए भी भारत को ही जिम्‍मेदार ठहराया। हमजा ने कहा, ‘पंजाब की नदियों का पानी रोककर पाकिस्‍तान को बंजर बनाने की इजाजत हम भारत को नहीं देंगे। पाकिस्‍तान के बेवकूफ नेता भारत को इन नदियों का पानी रोकने की इजाजत देकर भारत से महंगे दर पर बिजली खरीदने जा रहे हैं।’

आपकी राय

क्‍या इस तरह के माहौल में पाकिस्‍तान से दोस्‍ती की उम्‍मीद की जा सकती है? क्‍या पाकिस्‍तान सरकार का यह दोहरापन नहीं है? इससे यह नहीं लगता कि सरकार भारत विरोधी प्रोपैगंडा में आतंकियों की मददगार है? अपनी राय सभी पाठकों के साथ शेयर करें और बहस में शामिल हों...

Friday, November 25, 2011

" आइये विचार करें दोष / गलती / त्रुटि आखिर क्या है ? "

@ गलती करने में कोई गलती नहीं है ।

@ गलती करने से डरना सबसे बडी गलती है । — एल्बर्ट हब्बार्ड

@ गलती करने का सीधा सा मतलब है कि आप तेजी से सीख रहे हैं ।

@ बहुत सी तथा बड़ी गलतियाँ किये बिना कोई बडा आदमी नहीं बन सकता । — ग्लेडस्टन

@ मैं इसलिये आगे निकल पाया कि मैने उन लोगों से ज्यादा गलतियाँ की जिनका मानना था कि गलती करना बुरा था , या गलती करने का मतलब था कि वे मूर्ख थे । — राबर्ट कियोसाकी

@ सीधे तौर पर अपनी गलतियों को ही हम अनुभव का नाम दे देते हैं । — आस्कर वाइल्ड

@ गलती तो हर मनुष्य कर सकता है , पर केवल मूर्ख ही उस पर दृढ बने रहते हैं । — सिसरो

@ अपनी गलती स्वीकार कर लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है । इससे दूसरे शब्दों में यही प्रमाणित होता है कि कल की अपेक्षा आज आप अधिक समझदार हैं । — अलेक्जेन्डर पोप

@ दोष निकालना सुगम है , उसे ठीक करना कठिन । — प्लूटार्क

@ त्रुटियों के बीच में से ही सम्पूर्ण सत्य को ढूंढा जा सकता है | -– सिगमंड फ्रायड

@ गलतियों से भरी जिंदगी न सिर्फ सम्माननीय बल्कि लाभप्रद है उस जीवन से जिसमे कुछ किया ही नही गया।

------ अब आप बताइए हम अपनी गलती न समझ पाने में कहाँ गलती कर रहे हैं ? हो सके तो इससे कुछ लाभ प्राप्त करें....

Tuesday, November 22, 2011

कुछ लोगों को गाँधीजी क्यों पसंद नहीं हैं?

1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।
2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।
3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
5.1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।
6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा। 7.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया। 8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।
11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।
14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।
17.गाँधी ने गौ हत्या पर पर्तिबंध लगाने का विरोध किया
18. द्वितीया विश्वा युध मे गाँधी ने भारतीय सैनिको को ब्रिटेन का लिए हथियार उठा कर लड़ने के लिए प्रेरित किया , जबकि वो हमेशा अहिंसा की पीपनी बजाते है .
19. क्या ५०००० हिंदू की जान से बढ़ कर थी मुसलमान की ५ टाइम की नमाज़ ????? विभाजन के बाद दिल्ली की जमा मस्जिद मे पानी और ठंड से बचने के लिए ५००० हिंदू ने जामा मस्जिद मे पनाह ले रखी थी…मुसलमानो ने इसका विरोध किया पर हिंदू को ५ टाइम नमाज़ से ज़यादा कीमती अपनी जान लगी.. इसलिए उस ने माना कर दिया. .. उस समय गाँधी नाम का वो शैतान बरसते पानी मे बैठ गया धरने पर की जब तक हिंदू को मस्जिद से भगाया नही जाता तब तक गाँधी यहा से नही जाएगा….फिर पुलिस ने मजबूर हो कर उन हिंदू को मार मार कर बरसते पानी मे भगाया…. और वो हिंदू— गाँधी मरता है तो मरने दो —- के नारे लगा कर वाहा से भीगते हुए गये थे…,,, रिपोर्ट — जस्टिस कपूर.. सुप्रीम कोर्ट….. फॉर गाँधी वध क्यो ?
२०. भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च 1931 को फांसी लगाई जानी थी, सुबह करीब 8 बजे। लेकिन 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी गई और शव रिश्तेदारों को न देकर रातोंरात ले जाकर ब्यास नदी के किनारे जला दिए गए। असल में मुकदमे की पूरी कार्यवाही के दौरान भगत सिंह ने जिस तरह अपने विचार सबके सामने रखे थे और अखबारों ने जिस तरह इन विचारों को तवज्जो दी थी, उससे ये तीनों, खासकर भगत सिंह हिंदुस्तानी अवाम के नायक बन गए थे। उनकी लोकप्रियता से राजनीतिक लोभियों को समस्या होने लगी थी। उनकी लोकप्रियता महात्मा गांधी को मात देनी लगी थी। कांग्रेस तक में अंदरूनी दबाव था कि इनकी फांसी की सज़ा कम से कम कुछ दिन बाद होने वाले पार्टी के सम्मेलन तक टलवा दी जाए। लेकिन अड़ियल महात्मा ने ऐसा नहीं होने दिया। चंद दिनों के भीतर ही ऐतिहासिक गांधी-इरविन समझौता हुआ जिसमें ब्रिटिश सरकार सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर राज़ी हो गई। सोचिए, अगर गांधी ने दबाव बनाया होता तो भगत सिंह भी रिहा हो सकते थे क्योंकि हिंदुस्तानी जनता सड़कों पर उतरकर उन्हें ज़रूर राजनीतिक कैदी मनवाने में कामयाब रहती। लेकिन गांधी दिल से ऐसा नहीं चाहते थे क्योंकि तब भगत सिंह के आगे इन्हें किनारे होना पड़ता.SASAS


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Saturday, November 19, 2011

धर्मनिरपेक्षवादियों की सच्‍चाई

धर्मनिरपेक्षवादियों की सच्‍चाई
1. गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत और पलायन पर क्यों नहीं होता ?

2. विश्व में लगभग 52 मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो ?

3. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?

4. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ?

5. किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?

6.
महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम
मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल
राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?

7. 1947
में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1%
रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश
बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या
हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई
मानवाधिकार हैं ?

8. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ?

9.
यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते
रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि "अल्लाह के सिवाय और
कोई शक्ति नहीं है" ?

10. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश
के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948
में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू
और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ?

11. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?

12. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?

13.
मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते
हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और
रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती ?

14. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ 85% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, 15% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?

अगर
नरेन्‍द्र मोदी जी अपने उपवास के दौरान किसी मुल्‍ला की टोपी नहीं पहनते
तो अपने आप को सेकुलर कहने वाले भांड मीडिया और कांग्रेसी कुत्‍ते भौंकने
लगते है कि यह सांप्रदायिक और हिन्‍दुवादी है परन्‍तु इन कुत्‍तों से यह
पूछो कि क्‍या यह मुल्‍ला अपने माथे पर तिलक और शरीर पर भग्‍वा चादर ओढ
सकते है या अपने गले में तुलसी की माला पहन सकते है अगर कोई हिन्‍दू
इन्‍हें यह पहनाना चाहे तो, यहां तक कि यह तो भारतमाता की जय और वंदे मातरम
बोलना भी इस्‍लाम के विरूद्ध मानते है तो पूछो इस भांड और बिकाउ मीडिया और
उन कांग्रेसी कुत्‍तों से जरा जो बार बार मोदी जी पर एक टोपी न पहनने के
कारण सांप्रदायिक और हिन्‍दूवादी होने का आरोप लगा देते है परन्‍तु उस
वक्‍त कांग्रेस सहित उन सभी राजनीतिक दलो एवं भांड तथा बिकाउ मीडिया का
सेकुलरवाद कहां चला जाता है?

श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के तीन दिन के
उपवास के दौरान बिकाउ और भांड मीडिया ने तथा कांग्रेसी कुत्‍तों व अन्‍य
विरोधी राजनीतिक दलों ने मुसलमानों को खुश करने के लिए अपनी पूरी ऐडी चोटी
का जोर लगा दिया कि किसी भी तरह नरेन्‍द्र मोदी को बदनाम किया जाए और इसी
काम में यह रात दिन लगे रहे और इसके लिए दो दो टके के कांग्रेसी व मल्लिका
साराभाई जैसे सेकुलर कुत्‍तों को अपने स्‍टुडियों में लाकर बैठा दिया गया
और वहां से मोदी जी को बदनाम करने की पूरी ताकत लगा दी मैंने इससे पहले इस
सारी मीडिया को केवल बाबा रामदेव के खिलाफ ही एकजुट देखा था जब इस बिकाउ और
भांड मीडिया ने बाबा रामदेव जी को बदनाम करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक
दी थी और कांग्रेस ने इस पूरी भांड और बिकाउ मीडिया को खरीदने के लिए इन पर
चौदह सौ करोड रूपये खर्च किए थे

जिस तरह यह भांड और बिकाउ मीडिया
देशभक्‍त बाबा रामदेव और श्री नरेन्‍द्र मोदी जी को बदनाम करने के लिए
एकजुट हो जाती है इसी तरह यह बिकाउ और भांड मीडिया देश में जब यह कांग्रेस
महंगाई करती है या देश पर इनके कारण आतंकवादी हमले होते या यह भ्रष्‍टाचार
करते है तब यह एकजुटता दिखाई नहीं देती है केवल अलग अलग करके सभी केवल
ज्‍यादा से ज्‍यादा एक या दो दिन ही उस खबर को गर्म रखते है वो भी केवल
लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए और अपनी टीआरपी बढाने के लिए परन्‍तु
कुछ दिन में ही एक साथ सारे बिकाउ चैनलों पर से महंगाई , आतंकवाद,
भ्रष्‍टाचार आदि मुददों को दबा दिया जाता है और फिर से एक बार कांग्रेसी
कुत्‍तें और बिकाउ और भांड मीडिया मुसलमानों की तेल मालिश में लग जाते है

अब शांति नहीं सिर्फ क्रांति आजादी की दूसरी लडाई के लिए
देशहित में इस ईमेल को अधिक से अधिक आगे भेजे - भारतमाता की जयहमारा लक्ष्‍य भ्रष्‍ट व्‍यवस्‍था परिवर्तन
JAGI HINDU JAGO

Friday, November 18, 2011

सुब्रमण्यम स्वामी जी द्वरा लिखित लेख ‘How to wipe out Islamic terror?’का हिन्दी अनुबाद---इस्लामिक आतंकवाद को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए?




JAGO HINDU JAGO
shubramanium Swamiजुलाई 13,2011 को मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए बम धमाकों के बाद हिन्दूओं को निर्णायक रूप से अपनी अन्तरात्मा को झकझोरने की जरूरत है। भारत का विनाश करने के लिए, मुसलिम आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं का हलाल तरीके से आए दिन खून बहाया जाना, हिन्दूओं द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आतंकवाद गैर कानूनी तरीके से ताकत के दुरूपयोग का वो हथियार है, जिससे आम जनता को भयभीत कर, उसे आतंकवादियों की इच्छा के विपरीत काम करने से रोकने व आतंकवादियों की नजाजय मांगो को समर्थन देने के लिए मजबूर करने के लिए उपयोग किया जाता है
भारत में हर महीने लगभग 40 आतंकवादी हमले होते हैं।इसीलिए हाल ही में अमेरिका के ‘आतंकवाद विरोधी केन्द्र’ के प्रकाशन ‘A Chronology of International Terrorism ’ में बताया गया है कि आज तक जितने आतंकवादी हमले भारत पर हुए हैं उतने आतंकवादी हमले दुनिया के किसी भी देश ने नहीं झेले हैं।
वेशक प्रधानमन्त्री माओवादी हिंसा को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बतायें लेकिन मेरा मानना है कि आज इस्लामिक आतंकवाद देश के लिए सबसे गम्भीर खतरा है।अगर बर्तमान गृहमन्त्री, प्रधानमन्त्री और UPA अध्यक्ष को आज हटा दिया जाए तो माओवादी हिंसा को एक महीन में उसी तरह समाप्त किया जा सकता है जिस तरह मैंने 1991 में बरिष्ठ मन्त्री के पद पर रहते हुए तमिलनाडु में LTTE व MGR ने 1980 में नक्सलवादियों को किया।मुसलिम आतंकवाद देश के लिए एक अलग तरह का खतरा है।
मुसलिम आतंकवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? इसके वारे में 2012 के बाद किसी के मन में कोई शंका नहीं रहेगी। 2012 में तालिवान पाकिस्तान पर कब्जा कर लेंगे व अमेरिका अफगानिस्तान छोड़ कर भाग जाएगा। उसके बाद इस्लाम अपने अधूरे काम को पूरा करने के लिए हिन्दूत्व से सीधी लड़ाई लड़ेगा। अलकायदा का नया सरगना, जो कि ओसामाविन लादेन का उताधिकारी है पहले ही घोषणा कर चुका है कि मुसलिम आतंकवादियों का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत है न कि अमेरिका।
कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दूबहुल भारत को ‘इस्लामी विजय का एक अधूरा अध्याय’ मानते हैं। हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि दुनिया के वाकी सभी वो देश, जिन पर इस्लाम ने विजय प्राप्त की , इस्लामी आक्रमण के दो दशकों के भीतर 100% इस्लाम में परिवर्तित हो गए। भारत एक अपबाद है । 800 वर्षों के अत्याचारी  बरबर मुसलिम शासन के बाद भी अविभाजित भारत में 75% हिन्दू अबादी थी। कट्टरपंथी मुसलमानों को यही बात आज तक सता रही है कि मुसलमानों द्वारा किए गए वेहिसाब जुल्मों के बाबजूद वो मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं का मनोबल तोड़ने में क्यों सफल न हो पाए।
हर दंगे के बाद नियुक्त किए गए जांच आयोगों की रिपोर्टों के अधार पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 1947 से लेकर आज तक जितने भी हिन्दू-मुसलिम दंगे हुए हैं उन सबकी शुरूआत कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा ही की गई---यहां तक कि गुजरात दंगों की शुरूआत भी कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा गोधरा में 56 हिन्दू महिलाओं और बच्चों को जिन्दा जलाकर की गई।
आज की परिभाषा के अनुसार मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए ये सबके सब हमले आतंकवादी गतिविधियां हैं। वेशक भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं लेकिन फिर भी कट्टरपंथी हिंसक मुसलमान हिन्दूओं पर जानलेवा हमले करने का दुशसाहस करते हैं। भारत के अन्य मुसलमान इन हमलों को या तो मौन स्वीकृति देते हैं या फिर इनमें कूद पड़ते हैं या फिर हिन्दूओं के मारे जाने का तमाशा देखते हैं। भारत में अत्याचारी बाबर से लेकर कातिल औरंगजेब तक और औरंगजेब से लेकर आज तक हिन्दूओं का कत्लयाम ही मुसलमानों का ईतिहास है। हिन्दूओं पर मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए जाने हमलों के प्रति उदासीन रहने में ,भूतकाल में दारा सिकोह व वर्तमान में एम जे अकबर व सलमान हैदर जैसे लोग, जो मुसलिम आतंकवाद के विरूद्ध खुलकर वोलने से नहीं डरते हैं,अपबाद हैं
कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले हमलों के लिए हिन्दू ही दोशी हैं।
कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा हिन्दूओं को निशाना बनाए जाने के लिए मैं मुसलमानों के बजाए हिन्दूओं को ही दोष देता हूं। में इन हमलों का दोष उन हिन्दूओं को देता हूं जिन्होंने सनातन धर्म में बाताई गई आत्मा और पतमात्मा की अबधारणा को चरम पर ले जाते हुए खुद को अपने आप तक सीमित कर लिया। लाखों हिन्दू विना किसी सरकारी सहयोग के अपने आप को व्यबस्थित कर कुम्भ मेले में ईकट्ठे हो सकते हैं ,लेकिन मेले के बाद ये सब हिन्दू कशमीर,मऊ, मेल्विशरम और मलप्पुरम व अन्य विधर्मियों के बहुमत वाले इलाकों में हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान के तहत मुसलमानों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं की पीड़ा से वेखबर,हमले के शिकार हिन्दूओं की सहायता के लिए विना कोई संगठित कदम उठाए घर की ओर लौट जाते हैं।
उधाहरण के लिए अगर आधे हिन्दू भी जाति ,भाषा व क्षेत्र के विभाजनों से उपर उठकर बोट करें तो एक सच्चे हिन्दू राजनीतिक दल को दो तिहाई बहुमत मिलेगा।
आज धर्मनिर्पेक्षतावादी ,उग्र हिन्दूओं द्वारा मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यकों पर किए गए छुट-पुट हमलों की बात करते हैं। लेकिन इन में से अधिकतर हमले कांग्रेस सरकारों द्वारा नियोजित रूप से करवाए गए, न कि संगठित हिन्दूओं द्वारा। जबकि ISI व पाकिस्तान की सेना द्वारा प्रयोजित व नियोजित हमलों को छोड़ दें तो मुसलमानों द्वारा किए गए अधिकतर हमले गैर राज्य उपद्रवियों द्वारा किए गए।
कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दूओं को निरूत्साहित करने के लिए हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले करते हैं ताकि हिन्दू अपने उन अधिकारों को छोड़ दें जो कि उन्हें नहीं छोड़ने चाहिए। इन हमलों का मूल उद्देशय भारतीय संस्कृति को कमजोर कर अन्त में भारत को समाप्त करना है। ये 1000 वर्ष से लड़े जा रहे हिन्दूविरोधी-भारतविरोधी युद्ध का वो अधूरा उद्देश्य है जिसकी बात ओसामाविन लादेन अक्कसर करता है।असल में मुसलिम आतंकवाद वही हथियार है जिसका उपयोग सुहरावर्दी और जिन्ना द्वारा 1946 में हिन्दूओं को पाकिस्तान बनाने की मांग मानने को मजबूर करने के लिए वंगाल में किया गया। कांग्रेस पार्टी ने हिन्दूओं का प्रतिनिधि बनकर मुसलिम आतंकवाद के आगे घुटने टेकते हुए देश के भारत का 25% हिस्सा धर्मनिर्पेक्ष थाली में सजाकर मुसलिम आतंकवादी जिन्ना के हबाले कर दिया। अब ये मुसलमान वाकी बचे 75% हिस्से पर आतंकवाद को हथियार बनाकर कब्जा करना चाहते हैं।
हिन्दूविरोधी ताकतें

हम ये नहीं कहते कि इस्लाम को छोड़कर किसी और ने हिन्दूओं
को निसाना नहीं बनाया।आजादी के बाद के 6 दशकों में अंग्रेजो के
सम्राज्यबाद से प्रभावित इ वी रामास्वामी के नेतृत्व वाले,द्रविड़यन
अन्दोलन ने तर्कशीलता के नाम पर हिन्दू धर्म को तर्कहीन करार
देने की कोशिश की और हिन्दू धर्म का प्रचार करने वाले पुजारियों
को आतंकित कर हिन्दू धर्म का प्रचार करने से रोकने की कुचेष्ठा
की।

आंदोलन के संगठनात्मक हाथ, द्रविड़ कझगम (डी के) ने 50 वर्ष तक इसलिए राबण की पूजा की ताकि हिन्दूओं द्वारा भगवान राम की अराधना करने का उपहास उड़ाया जा सके व माता सीता के अपहरण को जायज ठहराकर हिन्दूओं को अपमानित किया जा सके। लेकिन जैसे ही द्रविड़ कझगम (DK) को ये पता चला कि रावण एक ब्राह्मण भगवान होने के साथ-साथ शिव का एक पवित्र भक्त भी था,तो इसने राबण की पूजा करनी बन्द कर दी।रामायण के अपमान की इस नीचता को छोड़ने के बाद DK ने अब उस भारत विरोधी LTTE का समर्थन करना शुरू कर दिया जिसने श्रीलंका में तमिल–हिन्दू नेताओं को मारने में विशेसज्ञता हासिल कर ली है। वेशक अब LTTE के नाश के बाद DK अनाथ हो गई है।
गृह-युद्ध की स्थिति
1960 के दशक में ईसाई मिशनरियों ने नागा लोगों को भारत के विरूद्ध भड़काया। जिसके परिणामस्वारूप अब नागा भी भारत से नागालैंड को अलग करवाकर भारत को और विभाजित करना चाहते हैं।
1980 के दशक में विदेश में प्रक्षिक्षण प्राप्त भारतविरोधी ईसाई आतंकवादियों ने मणिपुर में हिन्दूओं को निशाना बनाया। ईसाई आतंकवादियों द्वारा मणिपुर में रहने वाले लोगों को धमकी दी गई कि या तो भारत का विरोध करो या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ। 
1986 से खासकर 1990 के दशक में कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने हिन्दूओं को निशाना बनाकर उनकी मां-बहन-वेटियों को अपनानित करने के साथ-साथ हिन्दूओं का बड़े पैमाने पर कत्लयाम कर उन्हें कशमीर घाटी छोड़ने को मजबूर किया। 
अब बड़े स्तर पर इस बात को माना जाने लगा है कि मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले कर रहे हैं व भारत के मुसलमान इन हमलों को मौन स्वीकृति दे रहे हैं। मुसलिम आतंकवादियों के विदेशी संरक्षक अब आतंकवादी हमलों को कुछ इस तरह का अन्जाम दे रहे हैं ताकि मुसलमानों को हिन्दूओं के विरूद्ध राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाया जा सके जिससे भारत में सर्विया और वोसनिया की तरह गृह युद्ध छेड़ा जा सके ।
मुसलमानों को 'उदारवादियों' और 'चरमपंथियों में विभाजित नहीं किया जा सकता है क्योंकि जब भी चरमपंथी मुसलमानों के विरूद्ध कदम उठाए जाते हैं तब तथाकथित उदारवादी उनकी ढ़ाल बनकर खड़े हो जाते हैं। पाकिस्तान की असैन्य सरकार ने पतंगवाजी पर सिर्फ इसलिए प्रतिबन्ध लगा दिया क्योंकि तालिवान पतंगवाजी को हिन्दूओं का खेल मानते हैं। मलेशिया और कजाकिस्तान की उदारबादी सरकारें हिन्दू-मन्दिरों को गिरा रहीं हैं।
*सामूहिक प्रतिक्रिया *
इसलिए भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारतविरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें सबसे पहला सबक ये सीखने की जरूरत है कि आतंकवाद के निशाने पर हिंदू हैं और भारत के मुसलमानों को धीमी प्रतिक्रियाशील प्रक्रिया के द्वारा आतंकवादी बनने के लिए क्रमादेशित किया जा रहा है ताकि वो हिन्दूओं के विरूद्ध आत्मघाती हमले करने पर अमादा हो जायें। हिंदू मानस को कमजोर करने और गृहयुद्ध का डर पैदा करने के लिए इन आतंकवादी हमलों को अन्जाम दिया जा रहा है।
और इसलिए क्योंकि आतंकवादियों के निशाने पर हिन्दू हैं, हिन्दूओं को हिन्दूओं के रूप में ही भारतविरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध संगठित होकर जबाबी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि कोई हिन्दू खुद को अलग थलग या लालचार महसूस न करे। हिन्दू को इसलिए आतंकवाद से मुंह नहीं फेर लेना चाहिए कि अभी तक उसके परिवार का कोई सदस्य इस आतंकवाद का सिकार नहीं हुआ है।
आज अगर एक हिन्दू सिर्फ इसलिए मारा जाता है क्योंकि वह हिन्दू ता तो यह सब हिन्दूओं की नैतिक मौत है। ये विराट हिन्दू का एक जरूरी और आबश्यक मानसिक रवैया है।( विराट हिन्दू की अबधारणा की अधिक जानकारी के लिए मेरी ‘Hindus Under Siege: The Way Out Haranand, 2006).’ देखें।
इसलिए हमें मुसलिम आतंकवाद का सामना करने के लिए हिन्दू के नाते सामूहिक मानसिकता की जरूरत है। इस जबाबी कार्यवाही में भारत के मुसलमान भी हमारे साथ आ सकते हैं अगर वो सच में हिन्दूओं के कत्लयाम के विरूद्ध हैं तो। मैं नहीं मानता कि भारतीय मुसलमान हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध तब तक हमारे साथ आयेंगे जब तक वो इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करते कि वेशक वो आज मुसलिम हैं लेकिन उनके पूर्वज भी हिन्दू ही हैं।
अपने पूर्वजों के वारे में इस सच्चाई को स्वीकार करना मुसलमानों के लिए आसान नहीं है क्योंकि मुसलिम मुल्हा इसका इसलिए विरोध करेंगे क्योंकि इस सच्चाई को स्वीकारने के बाद एक तो भारतीय मुसलमानों में इस्लाम से मिली आत्मघाती कट्टरता कमजोर हो जाएगी और दूसरा इस सच्चाई को जानने व स्वीकारने के बाद उनकी हिन्दू धर्म में घर बापसी की सम्भावनायें बढ़ जायेंगी। कहीं भारतीय मुसलमान इस सच्चाई को स्वीकार न कर लें इसीलिए मुसलमानों के धार्मिक नेता हर हाल में काफिर बोले तो हिन्दूओं के विरूद्ध हिंसा और नफरत का प्रचार प्रसार करते रहते हैं।(उधाहरण के लिए आप कुरान के अध्याय 8 की आयत 12 पढ़ सकते हैं।) इस्लामिक आतंकवादी संस्था सिमी(SIMI) पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि भारत दारूल हरब है और SIMI इसे दारूल इस्लाम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का दारूल हरब होना, मुसलमानों को हिन्दूओं का कत्लयाम करने ,हिन्दूओं के मान सम्मान को ठेस पहुंचाने ,हिन्दूओं की मां-बहन-बेटियों की इज्जत आबरू के साथ खिलबाड़ करने के साथ साथ उन्हें हिन्दूओं के प्रति हर तरह के नैतिक बन्धनों से मुक्त करता है क्योंकि मुसलमानों को कुरान व हदीस में दारूल हरब को दारूल इस्लाम बनाने के लिए ये सब करने का आदेश दिया गया है।
बृहद हिन्दू समाज
परन्तु फिर भी अगर कोई मुसलमान इस बात को स्वीकार करता है कि उसके पूर्बज हिन्दू हैं तो हम उसे बृहद हिन्दू समाज बोले तो हिन्दूस्तान के अंग के रूप में स्वीकार कर सकते हैं।भारत अर्थात इंडिया अर्थात हिन्दुस्तान हिन्दूओं और अन्य जिनके पूर्बज हिन्दू हैं उन सबका देश है। यहां तक कि भारत में रहने वाले पारसियों और यहूदियों के पूर्बज भी हिन्दू ही थे। अन्य जो भारत से अपना खून का रिस्ता होने की बात को अस्वीकार करते हैं या फिर जिनका भारत से खून का रिस्ता है ही नहीं या फिर वो दिदेशी जो मात्र पंजीकरण की बजह से भारतीय नागरिक बने हैं वो भारत में रह तो सकते हैं लेकिन उन्हें बोट डालने का अधिकार नहीं दिया जा सकता (मतलब वो चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हो सकते)।
इसलिए आतंकबाद का मुकाबला करने बालीनीतिपर अमल करने से पहले हर और प्रतेक हिन्दू का प्रतिबद्ध और बिराट हिन्दू बनना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को बिराट हिन्दू बनने के लिए एक हिन्दू मानसिकता रखना मतलब उसकी एक ऐसी मानसिकता होना जरूरी है जो व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र के अन्तर को समझ सके।
बिराट हिन्दू होने के लिए किसी हिन्दू का पबित्र, इमानदार और पढ़ा-लिखा होना ही काफी नहीं है।ये सब व्यक्तिगत चरित्र के अंग हैं। राष्ट्रीय चरित्र वो मानसिकता है जो सक्रिय व पूरी ताकत से देश की पबित्रता और अखण्डता के लिए प्रतिबद्ध रहती है।उधाहरण के लिए मनमोहन सिंह(प्रधानमन्त्री) का व्यक्तिगत चरित्र तो ठीक दिखता है परन्तु अर्द्ध साक्षर सोनिया गांधी की एक रबर स्टैंप की तरह काम करते हुए हर राष्ट्रीय मुद्दे पर घुटने टेक देने की वजह से ये साबित हो चुका है कि उसका कोई राष्ट्रीय चरित्र नहीं है।
भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारतविरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें दूसरा सबक ये सीखना चाहिए कि क्योंकि आतंकवादियों का उदेश्य हिन्दूओं का मनोबल तोड़ना और हिन्दू संस्कृति को समाप्त करने के लिए भारत के हिन्दू आधार को तबाह करना है इसलिए हमें आतंकवादियों के आगे न तो हथियार डालने चाहिए और न ही आतंकवादियों की किसी भी मांग को मानना चाहिए। आतंकवाद से लड़ने की किसी भी नीति का मूल आधार यही होना चाहिए कि हम आतंकवादियों की किसी भी मांग को किसी भी हालात में नहीं मानेंगे।हमारे हाल के इतिहास में इसनीतिपर विलकुल भी अमल नहीं किया गया। जबसे हमने 1947 में मुसलिम आतंकवादियों के दबाब में पाकिस्तान बनाने की मांग को स्वीकार किया है तब से हम दबाब में बार-बार आतंकवादियों के आगे घुकने टेक देते हैं।
आतंकवादियों के सामने घुटने टेकने की घटनायें।
1989 में मुफ्ती मुहम्द सैयद की वेटी रूविया को आतंकवादियों से मुक्त करवाने के लिए वी पी सिंह सरकार द्वारा भारतीय जेलों से पांच आतंकवादियों को छोड़ दिया गया।
इस घटना ने अपराधियों को कशमीरी अलगाववादियों व उनके समर्थकों की आँखों में नायक बना दिया ।क्योंकि इन अपराधियों ने हिन्दूओं की सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देने में सफलता हासिल की थी।रूविया को छुड़ाने के लिए आतंकवादियों के आगे घुटने टेकना जरूरी नहीं था। 
भारत के आधुनिक इतिहास में आतंकवादियों के आगे घुटने टेकने की सबसे शर्मनाक घटना तब घटी जब 1999 में आतंकवादियों ने भारतीय विमान सेवा की उड़ान IC-814 को अगवा कर कन्धार पहुंचा दिया। सरकार ने न्यायालय से आज्ञा लिए विना ही तीन आतंकवादियों को छोड़ दिया। मानो देश को शर्मशार करने के लिए इतना ही काफी न हो आतंकवादियों को पाकिस्तान में धकेलने के बजाए, उनके साथ एक बिशेष अतिथी जैसा बर्ताव करते हुए प्रधानमन्त्री के विमान में विठाकर एक बरिष्ठ मन्त्री द्वारा कन्धार पहुंचाया गया।
ये तीनों आतंकवादी कन्धार में छोड़े जाने के बाद वापिस पाकिस्तान गए। पाकिस्तान जाकर इन तीनों आतंकवादियों ने हिन्दूओं को कत्ल करने के लिए तीन अलग-अलग आतंकवादी संगठन बनाए।मुहम्दहजर जिसे ततकालीन सुरक्षा सलाहकार ब्रजेस मिश्र ने मेमना बताया था ने छोड़े जाने के बाद लश्करे तैयावा की कमान सम्भाली ।लश्करे तैयवा वह गिरोह है जिसने श्रीनगर से लेकर बंगलौर तक हिन्दूओं को लहुलुहान करने के लिए बार-बार हमलों को अन्जाम दिया। अजहर ने मध्य 2000 से लेकर अब तक 2000 से अधिक हिन्दूओं का खून बहाया।यही अजहर दिसम्बर 13, 2001 में संसदभवन पर हुए हमले के लिए भी जिम्मेदार है। तीसरा आतंकवादी जरगर अल-मुझाहिदीन-जंगान की स्थापना करने के बाद आजकल डोडा और जम्मू में हिन्दूओं का खून बहा रहा है। 
कन्धरा में की गई ये मुर्खता हमें के सबक देती है कि हमें कभी भी, किसी भी हालात में आतंकवादियों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए। अगर आप आतंकवादियों के आगे घुटने टेकते हैं तो आप घुटने टेक कर बचाए गए हिन्दूओं से कहीं ज्यादा हिन्दूओं का कत्ल करवायेंगे। इसलिए आतंकवादियों से किसी भी तरह की सौदेबाजी पर लगाम लगाकर ,आतंकवादियों के सर्वनाश के लिए आगे बढ़ना चाहिए।
सच का सामना
भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारतविरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें तीसरा सबक ये सीखना चाहिए कि आतंकवादी घटना कितनी भी छोटी या कम महत्व क्यों न हो देश को जबाबी कार्यवाही हर हाल में करनी चाहिए---आतंकवादी घटना के बराबर या फिर विनम्र कार्यवाही नहीं वल्कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए पूर्ण कार्यवाही।
उधाहरण के लिए अय़ोध्या पर किया गया आतंकवादी हमला वेशक बड़ा हमला नहीं था लेकिन हमें आतंकवादियों के हमले पर जबाबी कार्यवाही करते हुए अयोध्य में एक भव्य राम मन्दिर का पुनरनिर्माण करना चाहिए था।
ये कलियुग है इसलिए हिन्दू विरोधी आतंकवादियों व उनके समर्थकों के प्रति किसी भी सातविक प्रतिक्रिया के लिए कोई जगह नहीं है। हिन्दू धर्म में आपाकलीन धर्म का प्रावधान है जिसपर हमें आज के हालात में अमल करना चाहिए। ये हमारे लिए सच्चाई का सामना करने का वक्त है। एक सभ्यता के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो हमें हिन्दू के रूप में संगठित होकर हिंसक व अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का मुकावला करना चाहिए या फिर परसियन,वेवीलोनियन और मिश्र की सभ्यता की तरह नष्ट होने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। ये सभ्यतायें अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का संगठित होकर मुकावला करने में असमर्थ रहीं इसलिए इनका सर्वनाश हो गया। हमें शाम, दाम, दण्ड, भेद नियम का पालन करते हुए हर हाल में अत्याचारी इस्लामिक आतंकवाद का सर्वनाश सुनिश्चित करना चाहिए वरना ये राक्षश हमें समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
गरीबी आतंकवाद का कोई कारक नहीं 
भारत में इस्लामिक आतंकवादियों को प्रेरणा कहां से मिलती है? बहुत से लोग हिन्दूओं को ये सलाह देते हैं कि मुसलिम आतंकवादियों पर जबाबी हमले करने के बजाए आतंकवाद के मूल कारण को खत्म करें। ये लोग मूल कारण भी बताते हैं।
निर्दोष हिन्दूओं का खून बहाने वाले आतंकवादियों के लिए हर तरह की सहानुभूति रखने वाले खूनी उदारवादी हमे बताते हैं कि आतंकवाद के पनपने व बढ़ने का कारण अनपढ़ता, गरीबी, शोषण और भेदभाव है। ये तथाकथित उदारबादी कुतर्क देते हैं कि इन आतंकवादियों का खात्मा करने पर जोर देने के बजाए आतंकवाद के इन चार कारणों को खत्म किया जाए। इन चार कारणों के समाप्त होते ही आतंकवाद खत्म हो जाएगा। इन प्रशनों का उतर देने से पहले ये समझ लेना बहुत जरूरी है कि मुझें नहीं लगता ये कातिल उदारवादी या खूनी बुद्धिजीवी भारत के प्रति बफादार हैं। ये हर व्यक्ति की भावनात्मक ताकत को खत्म कर उसे जिन्दा मुर्दा बना देना चाहते हैं। मतलब मजबूरी को ये हिन्दूओं की मानसिकता का अंग बना देना चाहते हैं। इस तरह की हीन भावना के साथ कोई भी देश य़ा समाज लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकता।
ये कहना बकवास है कि जो आतंकवादी आज तक हमले कर लाखों हिन्दूओं का खून बहा चुके हैं वो गरीब हैं।उधाहरण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा विन लादेन अरबपति है।खनिज तेल से वेहिसाब पैसा कमाने वाले अमीर देश मुसलिम आतंकवादियों को संरक्षण और आर्थिक मदद पहुंचाते हैं। ब्रिटेन में आतंकवादी हमलों को अन्जाम देने के दोषी सबके सब आतंकवादी साधन सम्पन मुसलमान हैं।
मुसलिम आतंकवादी अनपढ़ भी नहीं हैं। आतंकवादियों के अधिकतर सरगना डाकटर,चार्टड एकौंटैंट(CA),एम बी ए(MBA) और अध्यापक हैं। उधाहरण के लिए दिल्ली में धनतेरस के दिन सैंकड़ों हिन्दूओं का कतल करने वाला आतंकवादी रसायन विज्ञान में सनातकोतर है व टायम सुकेयर पर हमले का असफल प्रयास करने वाला आतंकवादी सहजाद MBA है वो भी अमेरिका के एक उच्चस्तरीय विश्वविद्यालय से।
उसका सबन्ध पाकिस्तान के एक अमीर परिबार से है। निश्चित तौर पर उसने अपने ही देश पाकिस्तान में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं सहा।11 सित्मबर,2001 को जिन 9 लोगों के गिरोह ने चार हबाई जहाजों को अगवा कर World Trade Towers सहित अन्य जगहों को निशाना बनाया निश्चित तौर पर उनके साथ भी अमेरिका में किसी तरह का भेदभाव या शोषण नहीं हुआ था। इसलिए ये कहना कि आतंकवाद गरीब आतंकवादियों की देन है पूरी से मूर्खतापूर्ण है।
अगर हम बांमपंथी उदारवादी कुतर्क को मान भी लें तो क्या बामपंथी इस बात से सहमत हैं कि मुसलिम देशों में प्रताड़ित सबके सब गैर मुसलमानों को आतंकवादी बनकर मुसलमानों का कत्ल करना चाहिए। कशमीर घाटी जहां पर मुसलमान बहुमत में हैं वहां पर घारा 370 लगाकर बहुसंख्यक मुसलमानों को विशेषाधिकार दिए गए हैं व अल्पसंखयक हिन्दूओं का कत्लयाम किया गया ,हिन्दूओं की मां-बहन वेटियों के साथ बालातकार किए गए, अन्त में उन्हें वहां से जगा दिया गया।वो अपने ही देश में वेघर होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं तो क्या ये उदारबादी उनके द्वारा मुसलमानों के विरूद्ध हथियार उठाने पर उनका बैसा ही साथ देंगे जैसा वो आज तक हिन्दूओं का कत्ल करने वाले मुसलिम आतंकवादियों का देते आए हैं?
यह कहना कि क्योंकि आतंकवादी मरने-मारने को तैयार हैं,वे अपना विवेक खो चुके हैं,उनका कोई घरबार नहीं है इसलिए उनका कत्ल नहीं किया जाना चाहिए। आतंकवादियों के सरगनाओं की इस आतंकवाद रूपी पागलपन में भी एक सोची समझी रणनीति और योजना है जिसके लिए उन्होंने निश्चित राजनीतिक उद्देश्य चुने हैं। इसलिए हमें आतंकवादियों को कुचलने के साथ-साथ एक ऐसी रणनीति पर अमल करना है जो आतंकवादियों के उद्देश्यों को पूरी तरह से विफल कर दे। ऐसी रणनीति कैसे बनाई जा सकती है। राबर्ट टरैगर और देशीसलाबा(Robert Trager and Dessislava Zagorcheva) ने शोध पत्र आतंकवाद का मुकाबला((‘Deterring Terrorism’ International Security, vol 30, No 3, Winter 2005/06, pp 87-123) में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाने के लिए समान्य सिद्धांत बताए हैं।
सामरिक योजना
अगर मुसलिम समाज आतंकवादियों के इन उद्देश्यों को गैरइस्लामिक घोषित कर इनकी निंदा और विरोध नहीं करता है तो इन सिद्धांतों का उपयोग कर मैं इस्लामिक आतंकवादियों के राजनैतिक उदेश्यों को असफल करने के लिए निम्नलिखित सामरिकनीतिका समर्थन करता हूं।
षडयन्त्र-1 :-कशमीर पर भारत को आतंकित करना।
रणनीति-1:- धारा 370 समाप्त कर,भूतपूर्व सैनिकों को कशमीर घाटी में बसाना। कशमीरी हिन्दूओं के लिए पुनन कशमीर का निर्माण करना,बलूचियों और सिंधियों को आजादी के लिए सहायता देना। 
षडयन्त्र-2:- हमारे मन्दिरों में बम धमाके कर भक्तों का कत्ल करना।
रणनिति-2:- जैसे को तैसानीति अपनाते हुए काशी विश्वानाथ मन्दिर परिसर सहित 300 अन्य जगहों से मसजिदों को हटाना।
षडयन्त्र :-3 भारत को दारूल इस्लाम बनाना । 
रणनिति-3:- भारत में एक समान नागरिक संहिता लागू करना,पढ़ाई के लिए संस्कृत को अनिवार्या बनाना,वन्देमातरम् का गान जरूरी करना और भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर सिर्फ उन्हीं गैर हिन्दूओं को बोट का अधिकार देना जो गर्व से ये स्वीकार करें कि उनके पूर्बज हिन्दू हैं। भारत का हिन्दूस्तान(हिन्दूओं और उन गैर हिन्दूओं का देश जिनके पूर्बज हिन्दू हैं) के रूप में पुन : नामकरण करना। 
षडयन्त्र-4 अवैध आप्रवास, धर्मांतरण, और परिवार नियोजन को अपनाने से इनकार द्वारा भारत की जनसांख्यिकी बदलें.
रणनिति-4:- देश में एक ऐसा राष्ट्रीय नियम लागू करें जिसके अनुसार हिन्दू धर्म से किसी भी अन्य धर्म में धर्मांतरण करना बर्जित हो। किसी भी अन्य धर्म से हिन्दू धर्म में घर वापसी इसमें प्रतिबन्धित नहीं होनी चाहिए। गैर हिन्दूओं द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी जाति में घर वापसी करने का स्वागत करें बशर्ते वे अनशासन का पालन करने को तैयार हों। भारत में रहने वाले अबैध वंगलादेशियों की शंख्या के अनुशार बंगलादेश की जमीन पर कब्जा कर लिया जाए। आज की संख्या के अनुसार सिलहट से खुलना तक के उतर का एक-तिहाई भारत को अबैध रूप से भारत में रह रहे बंगलादेशियों को बसाने के लिए अपने कब्जे में ले लेना चाहिए।
षडयन्त्र-5 हिन्दूओं के अन्दर आत्मगलानी का बोध पैदा करने व उन्हें आत्म समर्पण के लिए मजबूर करने के मकसद से मस्जिदों, मदरसों और चर्चों में अश्लील लेखन और उपदेश के माध्यम से हिंदू धर्म को बदनाम करना।
रणनिति-5:- हिन्दू मानसिकता के विकाश का प्रचार-प्रसार करें( मेरी नई पुस्तक ‘हिंदुत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण’ Haranand, 2010 देखें।)
समाधान का समय
भारत इस तरह की रणनीति अपनाकर सिर्फ पांच बर्षो में अपनी आतंकवाद की समस्या का समाधान निकाल सकता है परन्तु इसके लिए हमें आतंकवाद द्वारा सिखाए गए उपरलिखित चार सबक हर समय याद रखने होंगे और राष्ट्र की रक्षा के लिए साहसिक,जोखिम भरे व कठोर कदम उठाने के लिए हिन्दू मानसिकता का निर्माण करना होगा।यदि यहूदियों को गैस चैंबरों में जलाए जाने के लिए मिमयाते हुए जाने वाले मेमनों से ज्वलंत शेर में सिर्फ 10 वर्ष में बदला जा सकता है तो हिन्दूओं के लिए तो उनसे कहीं वेहतर हालात (आज भी हम भारत का 83 प्रतिशत हैं) में ये काम सिर्फ पांच वर्ष में करना किसी भी तरह से मुशकिल नहीं है।
परम्पूजनीय गुरूगोविन्द सिंह जी द्वारा हमें पहले ही रास्ता दिखा दिया गया है कि किस तरह सिर्फ पांच निडर लोग आध्यात्मिक मार्गदर्शन में सारे समाज को बदल सकते हैं।यहां तक कि अगर आधे हिन्दू मतदाता भी संगठित होकर हिन्दू के रूप में, इमानदारी से हिंदू एजेंडा के लिए प्रतिबद्ध पार्टी को,बोट डालने के लिए प्रोतसाहित किए जा सकें तब भी हम परिवर्तन के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं। और अंततः सच्चाई के इस क्षण में एक लोकतांत्रिक हिंदुस्तान में यही आतंकवाद से लड़ने की रणनीति में निम्नतम जरूरत है।

सांप्रदायिक दंगे जिम्मेबार कौन..JAGO HINDU JAGO

सांप्रदायिक दंगे जिम्मेबार कौन

ये सरकार जिस तरह साँप्रदायिक दंगों को हिन्दुओं के विरूद्ध हथियार के रूप में प्रयोग कर रही है। उसे देखकर तो लगता है कि जिहादी हमलों में इतने हिन्दुओं की जान जाने के बावजूद सरकार को मुस्लिम जिहादी मानसिकता का एहसास ही नहीं है ।
इस सरकार की जानकारी के लिए हम बता दें कि आज तक देश में हुए दंगों में से 95% दंगों की शुरूआत अल्पसंख्यकों ने की है। इन में से भी अगर 2-4% दंगों को छोड़ दें तो बाकी सब की शुरूआत मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने की है ।
आम-मुसलमान खुद को उतना ही भारतीय मानता है जितना बाकी भारतीय मानते हैं इसलिए उसे हिन्दू पूजा पद्धति बोले तो भारतीय पूजा पद्धति पर कोई तकलीफ नहीं होती ।
तकलीफ होती है तो उन मुस्लिम जिहादियों को जो खुद को औरंगजेब और बाबर के उतराधिकारी मानकर इस भारत को इस्लामी राज्य बनाने के षड़यन्त्र को इस सैकुलर गिरोह के सहयोग से व अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए बने विशेष कानूनों के दुरूपयोग से हिन्दुबहुल क्षेत्रों पर लगातार हमला कर आगे बढ़ा रहे हैं ।
अगर आपको नहीं पता तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इतिहास इन तथ्यों का साक्षी है कि कितने ही बार इन जिहादियों ने अल्लाह हो अकबर के नारे लगाते हुए मन्दिरों शिवाल्यों व अन्य पूजा स्थलों पर हमला कर तबाही मचाई व अनगिनत हिन्दुओं को इस्लाम के नाम पर हलाल किया ।
इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही सैकुलर जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार व इसके सहयोगी गद्दार मीडिया ने बार-बार साँप्रदायिक दंगों का जिकर कुछ इस अन्दाज में किया कि मानो इन दंगों के लिए हिन्दू जिम्मेवार हों।
हम इतने बड़े पैमाने पर हिन्दुओं के विरूद्ध हुई हिंसा के बारे में लिखना नहीं चाहते थे। परन्तु इस सेकुलर गिरोह द्वारा सामप्रदायिक दंगों के बहाने जिहादियों द्वारा किए जा रहे हिन्दुओं के कत्लों को जायज ठहराने की दुष्टता ने हमें ये सब लिखने पर मजबूर कर दिया। हमें परेशानी मे डाल दिया कि कहाँ से शुरू करें इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा शुरू किए गए दंगों का लेखा-जोखा। अधिकतर देशद्रोही चैनल तो जिहादियों का समर्थन करने व हिन्दुओं को अपमानित करने में मुस्लिम जिहादियों को भी पीछे छोड़ देते हैं । अगर हम 1945 तक हुए हिन्दुओं के नरसहारों को न भी लिखें तो भी इन मुस्लिम जिहादियों ने 1946 के बाद ही हिन्दुओं पर इतने जुल्म ढाये हैं कि इनके बारे में सोचते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं ।
मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?
इतना कुछ हो जाने पर भी ये गिरोह जो खुद को सैकुलर कहता है इन जिहादियों का साथ क्यों दे रहा है ?
क्यों इस गिरोह को हिन्दुओं के कत्ल करवाने में फखर महसूस होता है विजय का एहसास होता है ?
क्यों और कैसे ये गिरोह हिन्दुओं के हुए हर नरसंहार के बाद जिहादियों के पक्ष में महौल बनाने पर उतारू हो जाता है ?
क्यों ये गिरोह हिन्दुओं को धोखा देकर उन्हें ही कत्ल करवाने में कामयाब जो जाता है ?
क्यों ये गिरोह हिन्दुओं के आक्रोश से बच जाता है ?
क्यों हिन्दू एकजुट होकर हिन्दुओं के कातिलों व उनके समर्थकों पर एक साथ हमला नहीं बोलते ?
हम शुरू करते हैं 1946 से जब कलकता में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों में 5000 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।
फिर नवम्बर में पूर्वी बंगाल के नौखली जिला में हिन्दुओं का नरसंहार किया गया सब के सब हिन्दुओं को वहां से भगा दिया गया उनकी सम्पति तबाह कर दी गई ।
विभाजन के दौरान कम से कम 20 लाख हिन्दू-सिखों का कत्ल सिर्फ वर्तमान पाकिस्तान में किया गया ।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1947-1951 तक जिहादी मुसलमानों द्वारा किए गये अत्याचारों के परिणामस्वरूप एक करोड़ हिन्दू-सिख भारत भागने पर मजबूर किए गए ।
इसमें चौंकाने वाला तथ्य ये है कि वर्तमान भारत में भी इस दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए और तब की सैकुलर सरकार तमाशा देखती रही जिहादियों की रक्षा में लगी रही हिन्दुओं को मरवाती रही ।
फरवरी 1950 में 10,000 हिन्दुओं का ढाका और बंगला देश(तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के अन्य भागों में नरसंहार किया गया । उसके बाद के कुछ महीनों में लाखों हिन्दुओं को वहां से भगाया गया ।
1950-60 के बीच में 50 लाख हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों द्वारा पूर्वी पाकिस्तान से भारत भगाया गया ।
1971 में पाकिस्तानी सेना ने बांगलादेश मुक्ति अंदोलन के दौरान 25 लाख हिन्दुओं का कत्ल किया । जिसके परिणामस्वरूप अधिकतर हिन्दू सुरक्षा की खोज में भारत भाग आये ।
उस वक्त की सरकार ने इन हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए ? कोई नहीं । आखिरकार बांगलादेश बनवाने का दावा करने वाले इन लोगों ने क्यों हिन्दुओं को लावारिस छोड़कर मरने पर मजबूर किया ?
सिर्फ इसलिए कि हिन्दू कभी संगठित होकर गैर हिन्दुओं पर हमला नहीं करता या फिर इसलिए कि कभी एकजुट होकर संगठित वोट बैंक नहीं बनाता ?
1989 में बांगलादेश में सैंकड़ों मन्दिर गिराए गए ।
1947 से 2000 के बीच जिहादी हमलों में 6 लाख चकमा बनवासियों का नामोनिशान मिटा कर मुसलमानों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उनकी औरतों को जबरन मुसलमानों के साथ विवाह करने को बाध्य किया ।
जागो ! हिन्दू जागो !
लड़ाई से भागो मत एकजुट होकर लड़ों वरना मिटा दिए जाओगे इन मुस्लिम जिहादियों व इनके आका धर्मनिर्पेक्षतावादियों द्वारा ।
1947-48 में मुसलमानों ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया(पी ओ के) वहां से सब हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया गया ।
1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद भारत समेत सारे भारत में मुस्लिम जिहाद के एक नये दौर की शुरूआत हुई ।
1986 में कश्मीर में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर एक तरफा हमले शुरू किए गए । जिहादियों ने एक को मारो एक का बलात्कार करो सैंकड़ों को भगाओ की नीति अपनाई । मुसलमानों ने मस्जिदों से लाउडस्पीकरों द्वारा जिहाद का प्रचार प्रसार किया । उर्दू प्रैस के द्वारा भी जिहाद का प्रचार प्रसार किया गया । जिहाद शुरू होते ही हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही उनके शत्रु बन गए । मुसलमानों ने संगठित होकर हिन्दुओं को निशाना बनाना शुरू किया ।
जिहादियों की भीड़ इक्ट्ठी होकर हिन्दुओं के घर में जाती उन पर हर तरह के जुल्म करने के बाद उनको दूध पीते बच्चों सहित हलाल कर देती । यहाँ समाचार दिया जाता पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ये सब कर दिया । लेकिन सच्चाई यही थी कि हिन्दुओं को हलाल करने वाले उनके पड़ोसी मुसलमान ही होते थे। जो हिन्दुओं को कत्ल करने के बाद अपने-अपने घरों में रहते थे ।
कश्मीर के अधिकतर पुलिसकर्मी व महबूबामुक्ती जैसे नेता इस्लाम के नाम पर इन जिहादियों का हर तरह से सहयोग करते थे अभी भी कर रहे हैं । कई बार तो बाप व भाईयों के हाथ पैर बांध कर उनके परिवार की औरतों की इज्जत लूटकर उसके फोटो खींच कर बाप और भाईयों को ये सब देखते हुए दिखाया जाता था । बाद में ये तसवीरें हिन्दुओं के घरों के सामने चिपका दी जाती थी । परिणाम जो भी हिन्दू इन तसवीरों को देखता वही अपने परिवार की औरतों की इज्जत की रक्षा की खातिर भाग खड़ा होता । और उसके पास रास्ता भी क्या था सिवाय हथियार उठाने या भागने के । हिन्दुओं ने हथियार उठाने के बजाए भागना बेहतर समझा । क्योंकि अगर वो हथियार उठाते तो ये सैकुलर नेता उन्हें अल्पसंख्यकों बोले तो मुसलमानों का शत्रु बताकर जेल में डाल देते फांसी पर लटका देते ।
हमें हैरानी होती है इन धर्मनिर्पेक्षता की बात करने वालों पर जो हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के बारे में देश-दुनिया को जागरूक करने वालों को आतंकवादी कहते हैं, साम्प्रदायिक कहते हैं और इन सब जुल्मों-सितम को राजनीति बताते है हिन्दुओं को गुमराह करते है । ये सब दुष्प्रचार सिर्फ जिहादी ही नहीं बल्कि जिहादियों के साथ-साथ इनके ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षता के पर्दे में छुपे ये राक्षस भी करते हैं जो अपनों का खून बहता देखकर भी अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनते । न केवल इन जिहादी आतंकवादियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं पर सरकार भी बनाते हैं और सत्ता में आने के बाद जिहादियों के परिवारों का जिम्मा उठाते हैं । उनको हर तरह की मदद की जिम्मेवारी लेते हैं जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देते हैं । हिन्दुओं को अपने घरों से भागने पर मजबूर करते हैं । जिहादियों के विरूद्ध सेना द्वारा कार्यवाही शुरू होने पर जिहादियों के मानवाधिकारों का रोना रोते हैं मतलब हर हाल में जिहादियों का साथ देते हैं ।
अगर आप सोचते हैं कि हम कोई पुरानी बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। जो कुछ कश्मीर में हिन्दुओं के साथ किया गया वो ही सबकुछ अब जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में दोहराय जाने की तैयारी हो चुकी है तैयारी ही क्यों उसकी तो शुरूआत भी हो चुकी है पिछले दिनों जब डोडा उधमपुर में मई 2006 में 36 हिन्दुओं का कत्ल किया गया तो इस नरसंहार में बच निकलने में सफल हुए हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें ये देख कर हैरानी हुई कि जो मुस्लिम जिहादी हिन्दुओं को इस तरह कत्ल कर रहे थे वो इन हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही थे । जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में इसके अतिरिक्त भी कई नरसंहार हो चुके हैं ।
पिछले दिनों हिमाचल के साथ लगते जम्मू के एक गाँव में गांव वालों ने जब एक मुस्लिम जिहादी को मार गिराया तो वहां के मुस्लिम जिहादी मुख्यमन्त्री के इशारे पर पुलिस इन गांव वालों की जान के पीछे पड़ गई । बेचारे गाँव वालों ने हिमाचल के चम्बा में छुप कर जान बचाई ।
जरा आप सोचो जो गुलामनबी आजाद माननीय न्यायालय से फांसी की सजा प्राप्त अफजल को निर्दोष कहता है क्या वो हिन्दुओं द्वारा मार गिराय गए जिहादी को आतंकवादी मान सकता है ?
क्या आपको याद है कि 20-20 बिश्व कप में भारत द्वारा पाकिस्तान को हरा देने के बाद जम्मू विश्वविद्यालय में देशभक्त हिन्दुओं द्वारा इस जीत की खुशी में भारत माता की जय बुलाय जाने के बाद किस तरह इन हिन्दुओं की पिटाई विशवविद्यालय के जिहादी मुसलमानों ने की और किस तरह सरकार के इशारे पर बाद में पुलिस ने उन दुष्टों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए इन देशभक्तों को ही निशाना बनाया ?
1993 तक कश्मीर में अधिकतर मन्दिर तोड़ दिय गए । आज सारे का सारा कश्मीर हिन्दुविहीन कर दिया गया है और ये गिरोह बात करता है हिन्दू आतंकवाद की साँप्रदायिकता की । कोई शर्म इमान नाम की चीज है कि नहीं । तब कहां चला जाता है ये सैकुलर गिरोह जब हिन्दुओं के नरसंहार होते हैं । तब तो ये सारा गिरोह जिहादियों का साथ देता है हिन्दुओं के नरसंहार करने वालों को गुमराह मुसलमान बताकर उनको सजा से बचाने के नय-नय बहाने बनाता है जिहादियों के समर्थन में सड़कों पर उत्तरता है ।
आप जितने मर्जी कानून बना लो अब जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को निहत्था मरने पर कोई बाध्य नहीं कर सकता । जो हमला करेगा वो मरेगा । यह हमारी नहीं सब हिन्दुओं के उस मन की आवाज है जो लाखों हलाल हो रहे हिन्दुओं की चीखें सुन कर अब और हिन्दुओं को इस तरह न मरने देने की कसम उठा चुके हैं । जिहादियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी और ऐसी सजा मिलेगी कि उनका हर हिन्दू के कत्ल में साथ देने वाले धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे ये राक्षस भी नहीं बचेंगे ।

1969 में गुजरात,1978 में अलीगढ़ ,1979 में जमशेदपुर, 1980 में मुरादाबाद,1982 और 88 में मेरठ,1989 में भागलपुर । कौन नहीं जानता कि ये सब के सब सांप्रदायिक दंगे मुसलमानों ने शुरू किए थे । बेशक बाद में इन में से कुछ दंगों में मुसलमानों को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी थी ।
जनवरी 1993 में भी मुम्बई में दंगे इन मुस्लिम जिहादियों ने ही शुरू किए थे और उसके बाद 12 मार्च 1993 को मुम्बई में ही बम्ब विस्फोट कर 600 हिन्दुओं का कत्ल किया व हजारों को घायल किया करोड़ों की सम्पति तबाह की सो अलग ।
15 मार्च 1993 में सी पी आई एम के सदस्य रासिद खान ने कलकता में बम्ब विस्फोट कर 100 लोगों का कत्ल किया ।
फरवरी 1998 में कोयम्बटूर में इन जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर अडवाणी जी को कत्ल करने की कोशिश की । इन बम्ब विस्फोटों में सैंकड़ो हिन्दुओं का कत्ल किया गया । इन हमलों के दोषी मदनी को इस सैकुलर सरकार ने न केवल सजा से बचाया बल्कि और हिन्दुओं का खून बहाने के लिए जेल से निकाल कर खुला छोड़ दिया ।
क्या आप भूल गए किस तरह गोधरा में 27 फरवरी 2002 को 2000 मुस्लिम जिहादियों की भीड़ जिसका नेतृत्व कांग्रेसी पार्षद कर रहा था, ने 58 हिन्दुओं को रेल के डिब्बे में जिन्दा जला दिया व इतने ही हिन्दुओं को घायल कर दिया, जो इन जिहादियों के बढ़ते हुए दुस्साहस को दिखाता है । बाद में किस तरह इस सैकुलर बोले तो देशद्रोही सरकार ने इन हिन्दुओं को जलाने वालों को बचाने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त जज द्वारा की जा रही जांच को बाधित करने का षड़यन्त्र किया !
अभी 2008 में किस तरह इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में रैली करने जा रहे सांसद योगी अदित्यनाथ पर आजमगढ़ में हमला बोल दिया । यह कैसी धर्मनिर्पेक्षता है जिसके राज में एक सांसद तक मुस्लिम जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने की कोशिश करने पर मुसलमानों के हमले का शिकार हो जाता है ? जिस देश में जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने पर एक सांसद तक सुरक्षित नहीं उस देश में आम हिन्दू बिना हथियार उठाये कैसे सुरक्षित रह सकता है ?
ठीक इसी तरह महाराष्ट्र धुले में इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में होने वाली रैली को दंगा फैला कर वहां की सरकार के सहयोग से रूकवाने में सफलता हासिल की । किस तरह उत्तर प्रदेश में इन जिहादियों ने बी एस पी नेता की हत्या की और किस तरह वहां की तत्कालीन सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार ने उन जिहादियों की सहायता की ।
उत्तर प्रदेश में मऊ मे हुए दंगों को कौन भुला सकता है जब एक मुस्लिम जिहादी विधायक अंसारी ने गाड़ी में घूम-घूम कर मुसलमानों को उकसा कर हिन्दुओं के कत्ल करवाये । हिन्दूसंगठनों के कितने ही कार्यकर्ता इन जिहादियों के हमलों में आज तक मारे जा चुके हैं । आये दिन हिन्दुओं पर हमला करना इन मुस्लिम जिहादियों की आदत सी बनती जा रही है ।
हिन्दू तो आत्मरक्षा में मजबूरी में जवाबी कार्यवाही करता है वो भी कभी-कभी पानी सिर के ऊपर से निकल जाने के बाद । हिमाचल के चम्बा में 1998 में इन मुस्लिम जिहादियों ने दर्जनों हिन्दुओं का कत्ल कर दिया । कत्ल होने वाले सभी मजदूर थे । कत्ल करने वाले चम्बा के ही मुस्लिम जिहादी हैं जो आज तक बिना किसी सजा के खुले घूम रहे हैं क्योंकि पुलिस के पास ऐसे जिहादियों से निपटने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं है।
सुन्दरनगर मण्डी में मुस्लिम प्रधान चुने जाने के बाद मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाये । मण्डी में ही उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम जिहादी जो दर्जी का काम करता था, ने हिन्दू लड़की पर तेजाब फैंक दिया । आपको हैरानी होगी कि उस वक्त मंडी में पुलिस अधीक्षक भी मुस्लिम ही था । बाद में ये जिहादी पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा ।
हिमाचल में ही आए दिन जगह-जगह सरकारी जमीन पर कब्र बनाकर कब्जा करने के प्रयत्न किये जा रहे हैं । हिन्दुओं द्वारा विरोध किए जाने पर अल्पसंख्यवाद का सहारा लिया जा रहा है ।
कश्मीर के जिन मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया वो भी अपने आप को आम मुसलमान बताकर हिमाचल व देश के अन्य हिन्दुबहुल हिस्सों में खुले घूम रहे हैं कभी मजदूरों के वेश, में तो कभी कपड़ा बेचने वालों के वेश में, तो कभी पल्लेदारों के वेश में प्रशासन उनका सहयोग कर रहा है । आम लोग इनकी बढ़ती संख्या को देखकर कोई अनहोनी न हो जाए ये सोच कर डर रहे हैं। हिन्दू संगठनों से इनके विरूद्ध कार्यवाही करने की गुहार लगा रहे हैं । हिमाचल का आम हिन्दू ये सोचने पर मजबूर हो गया है कि कहीं ये लोग कश्मीर में सेना की कार्यवाही से बचने के लिए तो हिमाचल नहीं आते । क्योंकि ये अक्सर सर्दियों में तब आते हैं जब पहाड़ों पर बर्फ पड़ जाती है जहां ये गर्मियां शुरू होते ही छुप जाते हैं व मौका पाते ही हिन्दुओं पर हमला बोल देते हैं । हिमाचल का चम्बा का डोडा के साथ लगता क्षेत्र तो इन जिहादियों की पक्की शरणगाह बनचुका है । सरकारी जमीन पर लगातार कब्जा किया जा रहा है हिन्दुओं की जमीन खरीद कर क्षेत्र को मुस्लिमबहुल बनाया जा रहा है और प्रशासन सो रहा है ।
कुछ वर्ष पहले बिलासपुर में एक मुस्लिम बस चालक/परिचालक ने हिन्दू लड़की को अगवा करने की कोशिश की । बाहर के अधिकतर जिहादी आम मुसलमानों के यहां शरण ले रहे हैं इन्हें जिहाद की शिक्षा दे रहे हैं हिन्दुओं के विरूद्ध भड़का रहे हैं । ये सब तब हो रहा है जब हिमाचल में हिन्दू 95% से अधिक हैं ।
अगर हिन्दू साम्प्रदायिक होते जैसे सैकुलर गिरोह प्रचारित करता है तो आज तक यहां एक भी मुसलमान जिन्दा न बचता ।पर सच्चाई यह है कि आज तक एक भी मुसलमान को हिन्दुओं ने हाथ नहीं लगाया है फिर भी हिन्दू साम्रदायिक और जिस गिरोह के सहयोग से मुसलमानों ने कश्मीर से हिन्दुओं का सफाया कर दिया वो गिरोह और मुसलमान –शान्तिप्रय सैकुलर ।
हिमाचल के हिन्दुबहुल होने के बावजूद मुस्लिम जिहादियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों व मुसलमानों द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण को हिन्दू कब तक सहन करेगा । एक वक्त तो ऐसा आयगा जब ये सब्र का बांध टूटेगा फिर क्या होगा...सब ठीक हो जाएगा !
अब ये सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार इन जिहादियों को दंगों में मारे जाने पर लाखों रूपये की सहायता की घोषणा कर इनका हौसला बढ़ा रही है व हिन्दुओं के जान-माल को खतरे में डाल रही है ।
खैर हम भी कैसी बात कर रहे हैं जो सरकार खुद किसी अंग्रेज की गुलाम हो वो हिन्दुओं को तबाह करने के सिवा कर भी क्या सकती है ? क्योंकि जब हिन्दू तबाह और बरबाद हो जांयेंगे तभी तो ये देशद्रोही इस भारत को तबाह करने में कामयाब हो पांयेगे !
अन्त में सिर्फ इतना कहेंगे कि जिहादियों ने मुम्बई की सड़कों पर जिस तरह सरेआम गोलियां बरसाईं व निहत्थे बेकसूर लोगों का कत्लेआम किया वो भी पुलिस की गाड़ी में बैठकर । जिसके परिणाम सवरूप अभिताभ बच्चन जैसे लोगों को अपना हथियार बगल में रखकर सोना पड़ा ।
इस सब से यही सिद्ध होता है कि अगर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हिन्दुओं में इन जिहादियों के विरूद्ध जागरूकता अभियान चला रही थी और लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकांत प्रोहित हिन्दुओं को आत्म रक्षा की ट्रेनिंग दे रहे थे तो अच्छा ही कर रहे थे क्योंकि जो सरकार इस समाज के खास लोगों की रक्षा नहीं कर सकती अपने अधिकरियों तक को नहीं बचा सकती वो भला आम लोगों की क्या रक्षा करेगी कैसे करेगी और क्यों करेगी वो तो चन्दा भी नहीं दे सकते !
ऐसे में जब सरकार आम हिन्दुओं को जागरूक करने वालों व आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वालों को जेल में बन्द करती है तो वो कुल मिलाकर आतंकवादियों के काम को आसान बनाती है क्योंकि आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लिए हुए लोगों को आतंकवादी इतनी आसानी से नहीं मार सकते जैसे मुम्बई की सड़कों पर मारा गया ।
जिस वक्त मुम्बई में कमांडो कार्यवाही चल रही थी ठीक उस वक्त मुस्लिम जिहादी इन्टरनैट पर दुआ कर रहे थे हे अल्लाह हिन्दुओं को तबाह और बरबाद कर दे। उन्हें ऐसी भयानक मौत दो ताकि उनकी रूह कांप जाए और हम हिन्दुस्थान को दारूल इस्लाम बनाने में कामयाब हो जांयें ।
अब ऐसे महौल में भारत के मुस्लिम जिहादी इस जिहाद में सहयोग नहीं करेंगे मात्र कल्पना तो हो सकती है यथार्थ नहीं । मामला सिर्फ आम मुसलमान को इस जिहाद में शामिल होने से बचाना है पर इन्हें तभी बचाया जा सकता है जब सरकार कड़े से कड़े कानून बनाकर जिहादियों के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी मौत के घाट उतार दे ।
अगर सरकार जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए उनको बचाने की कोशिश करती है जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने वालों को जेल में डालती है तो फिर ये काम तो प्रखर देशभक्त लोगों को ही करना पड़ेगा । क्योंकि अगर इस जिहाद को यथाशीघ्र जड़मूल से समाप्त न किया गया तो ये हर भारतीय का सुख चैन छीन लेगा ।
कुछ लोग अज्ञानवश जिहादी आतंकवाद की तुलना सिखों के आतंकवाद से करने की गलती करते हैं वो ये भूल जाते हैं कि सिखों का इतिहास धर्म की रक्षा की खातिर की गई बेहिसाब कुरबानियों का इतिहास है। सिखों का हिन्दुओं के साथ खून का वो गूढ़ रिश्ता है जिसने मुशकिल की उस घड़ी में भी हिन्दू-सिखों की आत्मा को मरने नहीं दिया । सिखों की धर्मिक पुस्तकें गैर सिखों के कत्लोगारद का समर्थन नहीं करतीं ।
अगर हम मुसलमानों के इतिहास को देखें तो ये हिन्दुओं के कत्लोगारद का इतिहास है इस इतिहास का हर पन्ना हिन्दुओं के ऊपर जिहादियों द्वारा किये हमलों से भरा पड़ा है । ये इतिहास धोखे, गद्दारी, व नमकहरामी का इतिहास है ।
अगर इतने हमलों और बर्बरता के बाद भी ईरान, मिश्र, मैसोपोटामिया, तुर्की, उत्तर अफ्रीका की तरह भारत का इस्लामीकरण न हो पाया तो ये कोई मुस्लिम जिहादियों की उदारता या दया की वजह से नहीं जैसा कि ये गद्दार गिरोह दुष्प्रचार करता है क्योंकि ये गुण तो इन जिहादी राक्षसों में थे ही नहीं, न आज हैं। ये तो हिन्दू क्राँतिकारियों व हिन्दुओं द्वारा लगातार किया गया कड़ा संघर्ष था जिसने भारतीय सभ्यता संस्कृति को बचाय रखा ।
शुरू में जब मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं पर हमला किया तो हिन्दू उनको अपने जैसा इन्सान समझने की गलती कर बैठे । जैसे जैसे हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों के अत्याचारी और बर्बर प्रवृति का पता चलता गया वैसे- वैसे हिन्दू जागरूक और संगठित होता गया ।
वर्तमान में मुस्लिम जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं पर हमला करने का अधुनिक मार्ग अपनाया है बम्ब विस्फोट उन क्षेत्रों में किए जाते हैं जहां मुसलमान बहुत कम संख्या में हैं जहां मुसलमानों की बड़ी संख्या है वहां आज भी हिन्दुओं को गला काट कर हलाल करने का मार्ग अपनाया जाता है जैसे कश्मीर में कई बार देखने को मिला ।
हिन्दुबहुल क्षेत्रों में जहां कहीं भी मुसलमानों की संख्या बढ़ जाती है वहां पर पहले हिन्दुओं/मन्दिरों/त्योहारों पर हमला कर दंगा फैलाया जाता है इन दंगों में पहले हिन्दुओं को छुरा घोंप कर मारा जाता था अब इन हमलों में भी छोटे-छोटे देशी कट्टों व बमों का इस्तेमाल होने लगा है। हमलों के दौरान दंगा रोकने में लगे पुलिस कर्मियों पर भी अक्सर हमला बोला जाता है । ये हमले अक्सर योजना बनाकर किये जाते हैं जिससे कि हिन्दुओं के जान-माल को अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाया जा सके ।
अगर कहीं हिन्दू आत्म रक्षा में तैयार बैठे हों और मुसलमानों को प्रतिक्रिया में नुकसान उठाना पड़ जाए तो फिर ये मुस्लिम जिहादी इसे अल्पसंख्यकों पर हमला बताकर जगह-जगह हिन्दुओं को सांप्रदायिक कहकर दुष्प्रचार शुरू कर देते हैं और ये जिहादसमर्थक गिरोह इनके इस दुष्प्रचार को आगे बढ़ाता है ।
आपको यहां पर इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि दुनिया का हर कानून इन्सान को आत्मरक्षा का अधिकार देता है फिर हिन्दुओं द्वारा इस अधिकार का उपयोग न करने के लिए दबाव बनाना व हिन्दुओं को इस अधिकार का उपयोग करने पर उन्हें बदनाम करना, उनको इन मुस्लिम जिहादियों के हाथों निहत्था मरने पर मजबूर करने के समान है जिससे हर किसी को बचने का प्रयत्न करना चाहिए ।