पाकिस्तान से करीब दो सौ हिंदू परिवार वहाँ हो रहे रोज रोज अत्याचारों से तंग आकर भारत मे शरण की मांग कर रहे है ..ये लोग दिल्ली के ‘मजनू का टीला ” मे खुले असमान के नीचे अपना डेरा जमाए है ..लेकिन केंद्र की कांग्रेस सरकार ने उनका आवेदन ठुकराते हुए उन्हें एक सप्ताह के अंदर भारत छोड़ने का हुक्म सुना दिया ..
पाकिस्तान मे तालिबान और वहाँ के स्थानीय गुंडे पाकिस्तानी प्रशासन की सहायता से हिन्दुओ का कत्ल , बलात्कार , अपहरण , जजिया कर , आदि जैसे अत्याचार वहाँ रोज करते है ..पकिस्तान मे हिन्दुओ (सिख समुदाय सहित ) को वोट देने का अधिकार नहीं है और उन्हें वहाँ दूसरे दर्जे की नागरिकता मिली हुयी है .इसलिए ये अपनी आवाज बुलंद भी नहीं कर सकते ..
ये बेचारे ये सोचकर भारत सरकार से शरण की मांग कर रहे थे कि भारत सरकार इनकी भावनाओ की कद्र करेगी .लेकिन इन बेचारोको ये नहीं मालूम था की भारत मे जो कांग्रेस की सरकार है वो हिन्दुओ के लिए तालिबान से भी ज्यादा क्रूर है .नहीं तो रात को दो बजे राजबाला को मीडिया के कैमरे के सामने लाठियो से पीट पीट कर हत्या नहीं की जाती ..उसे १२३ दिन कोमा मे रहने के वावजूद सरकार या कांग्रेस का कोई भी नुमाइंदा उसका हाल चाल लेने तक नही गया ..
लेकिन सवाल ये है कि अगर बांग्लादेश से करोडो मुसलमान भारत आकर बस सकते है तो फिर पाकिस्तान से दो सौ हिंदू क्यों नहीं ?? असल मे कांग्रेस अपना वोटबैक का नफा नुकसान समझकर ही विदेशियो को भारत मे शरण देती है ..कांग्रेस को लगता है कि बंगलादेशी मुसलमान उसके लिए वोट बैंक बन सकते है ..आसाम के चुनावो मे अब बंगलादेशी मुसलमान ही हार और जीत तय करते है ..कांग्रेस को लगता है कि हिंदू उसके लिए वोट बैंक नहीं है .
आप दिल्ली की सीलमपुर , सीमापुरी . मुंबई की धारावी .कोलकाता आदि जगहों के झोपड़पट्टी मे ९०% बंगलादेशी रहते है ..इनलोगों ने स्थानीय कांग्रेसी नेताओ से मिलकर अपना नाम निर्वाचन सूची मे डलवा दिया है और इनको कांग्रेस अपना बड़ा वोट बैंक मानती है ..
भारत के शरण और आव्रजन कानून के मुताबिक भारत हिन्दुओ को शरण देने के लिए बाध्य है--
अंग्रेजो ने भारत से करोडो हिन्दुओ को गन्ने की खेती करने के लिए मारीशस , गुयाना , डच और फ्रेंच गुयाना , सूरीनाम , त्रिनिदाद ,टोबैगो .फिजी , वेस्टइंडीज, बहसूमा, इंडोनेशिया, सेसल्स , और पेसिफिक के कई छोटे छोटे द्वीप पर लेकर गए ..उन्होंने उनके साथ एक एग्रीमेंट किया था कि अगर उनके आने वाली पीढियां भारत मे आकर बसना चाहेगी तो भारत सरकार उनको अपना नागरिक मानकर उन्हें बसाएगी ..फिर बाद मे अंग्रेजो ने दूसरे हर देश के हिंदू और सिक्खो के लिए इस कानून का फैलाव कर दिया …युगांडा मे जब ईदी अमिन के जुल्मो से तंग आकर वहाँ कई पीढियो से बसे लाखो गुजरातियो को इसी कानून के तहत वापस भारत मे बसाया गया ..
आज़ादी के बाद जब सरदार पटेल भारत के गृह मंत्री बने तो उन्होंने इस कानून को और कड़ा कर दिया ..उन्होंने कहा कि भारत सरकार का सिर्फ ये क़ानूनी जबाबदारी नहीं बल्कि ये भारत सरकार की नैतिक जबाबदारी बनती है कि दुनिया के किसी भी देश मे यदि हिन्दुओ और सिखों पर अत्याचार हों तो भारत सरकार इसके खिलाफ पुरजोर आवाज उठाये ..
कांग्रेस की नरसिंहराव सरकार जो कांग्रेस की पहली ऐसी सरकार थी जो गाँधी परिवार की काली और गन्दी छाया से दूर रहकर निर्भीकता से अपना कार्यकाल पूरा किया .और कई क्रान्तिकारी बदलाव इस देश मे किया . इसी सरकार ने सबसे पहले इजरायल को मान्यता देते हुए इजरायल से कूटनीतिक संबंध स्थापित किये …इसी सरकार के समय मे जब फिजी मे महेंद्र चौधरी की सरकार को वहा की सेना ने हटा दिया और हिन्दुओ पर जुल्म करने लगी तो भारत सरकार ने वहाँ से हिन्दुओ को भारत लाने की वयस्था की और उनको भारत मे बसाया गया ..खुद महेद्र चौधरी ने अपना एक घर गुणगांव मे बनवाया ..
लेकिन आज की कांग्रेस सरकार के उपर घोर हिंदू विरोधी मानसिकता हावी है तभी तो कानूनों को ताक पर रख कर विदेश मंत्रायल मे पाकिस्तानी हिन्दुओ और सिक्खो को भारत से जाने का फरमान सुनाया है ..
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